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कॉलेज में होगी डायलसिस मशीन स्थापित मरीजों को नहीं जाना होगा रोहतक, दिल्ली

7 वर्ष पहले
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एमआरआईऔर सीटी स्कैन टेस्ट के साथ-साथ मरीजों को डायलसिस और बीएमडी मशीन से जांच की सुविधा मिलेगी। कॉलेज में डायलसिस मशीन स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जिले के सामान्य अस्पताल में इसकी सुविधा होने के कारण मरीजों को दिल्ली या फिर पीजीआई रोहतक जाना पड़ता है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि ये मशीन स्थापित होने के बाद मरीजों को काफी फायदा होगा। उन्हें कॉलेज में ही ये सुविधा मिल सकेगी।

मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 2500 से अधिक ओपीडी है। इनमें कुछ मरीजों की हालत अधिक गंभीर होती है। कॉलेज में एमआरआई, सीटी स्केन, डायलसिस की सुविधा होने के कारण मरीजों को पीजीआई रोहतक रेफर किया जाता है। जहां पर लंबी वेटिंग होती है। ऐसे मरीजों को प्राइवेट लैब से टेस्ट कराने पड़ते हैं। टेस्ट महंगे होने के कारण कुछ मरीज टेस्ट नहीं करा पाते। जिससे बीमारी और अधिक बढ़ जाती है। इसे देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने मरीजों को टेस्ट की सुविधा मेडिकल कॉलेज में ही मुहैया कराने का निर्णय लिया था। उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज में करोड़ों रुपए की लागत से सेंट्रल लैब स्थापित की गई है। जिसमें शरीर के प्रत्येक हिस्से की जांच की जा सकती है।

30 सितंबर को मेडिकल कॉलेज में पहुंचेगी टीम

सीटीस्केन और एमआरआई टेस्ट की सुविधा शुरू करने के लिए 30 सितंबर को केएमसी, मंगलौर की टीम कॉलेज में आएगी। कॉलेज में यह सुविधा पीपीपी के अंतर्गत शुरू की जाएगी। टीम कॉलेज में व्यवस्थाओं का जायजा लेगी। कॉलेज के साथ एमओयू हो चुका है। जल्द ही यह सुविधा मरीजों को मिल सकेगी। कॉलेज का कहना है कि मशीन अत्याधुनिक होगी। जिससे मरीजों को टेस्ट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

जैसे-जैसे उम्र ढलने लगती है, हड्डियां कमजोर होने लग जाती है। यही कारण है कि बुढ़ापा आने पर जोड़ों में दर्द होना आम बात हो जाती है। कॉलेज में हड्डियों की मजबूती की जांच करने के लिए बीएमडी मशीन लगाई जाएगी। मशीन से जांच करके पता लग जाएगा कि हडिडयां कितनी कमजोर है। रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर इसका उपचार कर सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर जांच और इलाज किया जाए तो लोगों को इस समस्या से राहत मिलने की संभावना रहती है।

शरीर में खून साफ करने का कार्य किडनी का होता है। जिस मरीज की किडनी खराब हो जाती है। उसका स्वयं खून साफ नहीं होता है। उसे डायलसिस की जरूरत पड़ती है। मशी