- Hindi News
- कृष्णा काॅलोनी से नामी कंपनी के डुप्लीकेट टायर ट्यूब मिले
कृष्णा काॅलोनी से नामी कंपनी के डुप्लीकेट टायर ट्यूब मिले
पुलिसकी अपराध जांच शाखा ने कृष्णा कालोनी से वाहनों की डुप्लीकेट ट्यूब पकड़ी हैं। यह ट्यूब कालोनी के एक गोदाम में रखी थी। शाखा ने कंपनी की सूचना और इसके अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया। शाखा के थाने में आरोपी से पूछताछ की जा रही थी। बताया जा रहा है कि सिएट कंपनी को सूचना मिली थी कि शहर में कंपनी के नाम पर डुप्लीकेट ट्यूबों की बिक्री हो रही है। सूचना के आधार पर कंपनी की तरफ से ऑथोराइज्ड स्पीड नेटवर्क ने अपने स्तर पर छानबीन की। छानबीन में सूचना सही पाई गई, जिसके बाद पुलिस प्रशासन को मामले से अवगत कराया गया। इसके बाद पुलिस की अपराध जांच शाखा के प्रभारी पवन कुमार और कंपनी के अधिकारी सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में कृष्णा कालोनी में छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया गया। छापामार दल में अपराध शाखा के सहायक उप निरीक्षक धर्मपाल के अलावा कंपनी के कपिल कुमार, रविश कुमार कपिल सांगवान आदि अधिकारी शामिल थे। छापे के दौरान कालोनी के एक आवास में बने गोदाम से सैकड़ों की संख्या में कार, मोटर साइकिल और स्कूटी आदि वाहनों की ट्यूब बरामद की गई। आवास के मालिक देश राज को हिरासत में ले लिया गया। देर शाम तक पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी। बताया गया है कि पूछताछ में उसने जानकारी दी है कि यह ट्यूब वह दिल्ली से लेकर आता था। बाद में इन्हें स्थानीय बाजार में सप्लाई कर दिया जाता। पुलिस ने उस ठिकाने के बारे में जानकारी ली, जिससे वह डुप्लीकेट ट्यूब लाता था।
छापामार कार्रवाई मंे टीम द्वारा बरामद की गई डुप्लीकेट टायर ट्यूब।
कंपनी अधिकारी सुरेंद्र कुमार के अनुसार गौर करने पर नकली और असली ट्यूब में फर्क पकड़ा जा सकता है। असली ट्यूब पर लाइनिंग होती है, जिसे नकली माल तैयार करने वाले नहीं बना पाते। उन्होंने कहा कि ट्यूब के पैक का कलर असली से धुंधला होता है। इसके अलावा नकली ट्यूब के पैक पर कंपनी के नाम के नीचे लोगो नहीं लगा होता। यही नहीं, नकली ट्यूब बनाने वाले कई बार पुरानी को नई में बदल देते हैं। गौर से देखने पर इसमें पंक्चर नजर आते हैं, हालांकि इन्हें ग्राइंडर से बड़ी सफाई से छिपा दिया जाता है। मगर ट्यूब में हवा भरने पर इन्हें पकड़ा जा सकता है।