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बाजारों में लगी स्ट्रीट लाइटें जलने की जांच शुरू हुई
नगर सुधार मंडल द्वारा शहर के तीन मुख्य बाजारों में लगाई गई स्ट्रीट लाइटें जलने की शिकायत की जांच शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग ने शनिवार को तीनों बाजारों में लाइटों की जांच की। जांच के लिए सभी लाइटें दिन में ही जलवाकर देखी गई। विंग के अधिकारियों ने तीन घंटे से अधिक समय तक इनकी जांच की। इन लाइटों की देख-रेख की जिम्मेदारी अब नगर परिषद के पास है।
इन लाइटों को नगर सुधार मंडल द्वारा करीब डेढ़ साल पहले पुरानी कचहरी चौक से उमरा गेट और जींद चौक तक लगवाया गया था। मंडल प्रशासन ने 2013 के आखिर में एक योजना के तहत 27 लाख रुपयों की लागत से नई लाइटें लगवा दीं। इनके लिए 40 खंभे लगाए गए। योजना के तहत कुल 80 नई स्ट्रीट लाइटें लगवाई गई। लाइटों को लगाने के बाद अरसे तक चालू नहीं किया गया। आलोचना होने पर मंडल ने चोरी की बिजली से इन लाइटों को जलाना शुरू कर दिया, लेकिन बिजली निगम के कड़े रुख को देखते हुए यह अधिक समय तक नहीं जल सकीं। लाइटें नगर परिषद के पास जाने के बाद कभी-कभार जलनी शुरू हुईं।
नोटिस में नहीं
नगरपरिषद के लाइट इंस्पेक्टर संदीप धींगड़ा ने कहा कि उनसे मंडल अधिकारियों ने दिन में लाइटें जलवाने को कहा। उन्होंने लाइटें जलवा दी। आगे क्या हुआ, उन्हें कुछ पता नहीं।
मंडल के अधिकारी भी साथ थे
जांचके दौरान नगर सुधार मंडल के उपमंडल अधिकारी देवेंद्र गक्खड़ भी टीम के साथ रहे। वे लाइटों की स्थापना और अब तक की स्थिति की जानकारी देते रहे।
इलेक्ट्रिकल विंग ने की जांच
लोकनिर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग ने दिन में लाइटें जलवाकर इनकी जांच शुरू की। विभाग के एसडीओ उदयवीर झांझडिय़ा के अलावा इलेक्ट्रिक विंग के सुखदेव शर्मा पर आधारित टीम ने जांच के दौरान क्या पाया। विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट एसडीएम योगेश मेहता के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
अफसरों तक पहुंचा मामला
करीब27 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद स्ट्रीट लाइटें नहीं जली तो कुछ लोगों ने सरकार और स्थानीय निकाय विभाग को अवगत कराया। लाइटों की क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठे। लाइटों के घटिया स्तर की होने और इनके जलने की शिकायत प्रशासन से भी की गई। एसडीएम ने लोक निर्माण विभाग की इलेक्ट्रिकल विंग को जांच के आदेश दिए।
शहर में लगी स्ट्रीट लाइट।