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गरीबों के लिए रैन बसेरा बनने की फाइल अटकी

7 वर्ष पहले
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कड़ाकेकी ठंड शुरू हो गई है शरीर को चीरने वाली ठंडी हवाओं ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। जिन लोगों के सिर पर छत नहीं है, उनके लिए ये ठंडी रात गुजारना कितना मुश्किल है, इस दर्द को सिर्फ वही बयां कर सकते हैं।

शहर में गरीब बेसहारा लोग स्थाई रैन बसेरा नहीं होने के कारण से बस अड्डे रेलवे स्टेशन पर रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। नगर परिषद द्वारा रैन बसेरा बनाने संबंधी फाइल स्थानीय निकाय विभाग में पिछले दो साल से अटकी पड़ी है। अभी तक इस पर कोई जवाब विभाग की तरफ से परिषद को नहीं मिला है। इस कारण से बेसहारा लोगों को छत नहीं मिल रही है। इस कारण से असहाय और निराश्रित खुले आसमान में सड़कों पर सर्द रात गुजारने को मजबूर हैं। सरकारी की तरफ से बेसहारा लोगों के लिए स्थाई रैन बसेरा उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान की जाती है। विशेषकर सर्दी के मौसम में इसकी विशेष जरूरत होती है। लेकिन शहर में रैन बसेरा के नाम पर कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

शहर में रैन बसेरा नही होने के कारण से सौ से अधिक लोगों को ठंडी रात बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर ही काटनी पड़ रही है। परिषद सूत्रों की मानें तो शहर में स्थाई रैन बसेरा बनने की अभी उम्मीद की किरण नजर नहीं रही है।

रैन बसेरा होने के कारण रेलवे स्टेशन के बाहर खुले में इस तरह रात गुजारनी पड़ रही है।

रैन बसेरा बनाने का मकसद गरीब निराश्रित लोगों को आश्रय देना है। इसमें रहने वालों को कंबल, दरी, तकिया, प्राथमिक उपचार की सुविधा नगर परिषद उपलब्ध करवाती है। इसका फायदा वे लोग भी उठा सकते हैं, जो रात के समय शहर में आते हैं और यहां उन्हें मजबूरी में किसी कारण से रुकना पड़ता है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं होता।