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पिछले आरक्षण आंदोलन में जगदीप रहे विवादों में, अब प्रशांत निशाने पर

5 वर्ष पहले
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पिछलेसाल फरवरी में चले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान विवाद में घिरने पर तत्कालीन एसडीएम जगदीप सिंह को जाना पड़ा था। इस साल फरवरी में ही शुरू हुए आंदोलन में मौजूदा एसडीएम प्रशांत अटकान विवाद में फंस गए हैं। फिलहाल वह दो सप्ताह के लिए अवकाश पर गए हैं। ड्यूटी पर लौटेंगे या उन्हें भी यहां से जाना पड़ेगा, प्रशासनिक हलकों में यह कयास पूरे दिन लगते रहे। जगदीप और प्रशांत में एक समानता और भी है कि दोनों ने जाट आरक्षण आंदोलन शुरू होने के दौरान ज्वाइन किया। जगदीप ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से महज चार दिन पहले यहां कार्यभार संभाला था। प्रशांत एक फरवरी को ही एसडीएम के रूप में यहां कार्यभार संभाला है। पिछले साल हुए जाट आरक्षण आंदोलन में तत्कालीन एसडीएम जगदीप सिंह पर एक समुदाय विशेष के लोगों की तरफदारी के खुले आरोप लगे। आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी हुई तो उन्हें निशाने पर लिया गया।

प्रदेश सरकार तक मामला पहुंचा, लेकिन सरकार की तरफ से पहले जांच को तरजीह दी गई। प्रकाश सिंह कमेटी ने जांच की और लोगों के आरोपों तथा अपने निष्कर्ष के आधार पर जगदीप सिंह पर लगे आरोपों को सही करार दिया, जिस पर सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर चंडीगढ़ तब्दील कर दिया। हालांकि उनके साथ तत्कालीन डीएसपी संदीप मलिक को भी यहां से जाना पड़ा। मलिक पर एसडीएम का साथ देने और आंदोलनकारियों पर सख्ती करने के आरोप लगे। प्रकाश सिहं कमेटी ने उन्हें भी दोषी पाया, जिस पर सरकार ने उनका यहां से चंडीगढ़ तबादला कर दिया। दोनों एसडीएम पर लगभग एक जैसे आरोप हैं, समुदाय विशेष की तरफ अपना झुकाव दिखाना। प्रशांत अटकान ने सवेरे सोशल मीडिया से मैसेज किए। चीफ सेक्रेटरी को कथित रूप से भेजा गया पत्र साझा किया। पत्र आधिकारिक तौर पर नहीं लिखा गया। स्कूली बच्चे की कॉपी के पन्ने पर पैन से लिखा। अपने हस्ताक्षर किए और सफाई दी। इस दौरान शांति बनाए रखने के लिए सहयोग की अपील करते रहे। पूरे दिन कहीं नजर नहीं आए, शाम को जानकारी मिली कि पंद्रह दिन के अवकाश पर चले गए हैं।

प्रशांत अटकान

एक साल में चार एसडीएम बदले

एसडीएमके तबादलों को लेकर एक साल में उपमंडल में नया रिकॉर्ड बना है। एक साल में चार एसडीएम तब्दील हो गए। जगदीप सिंह को पिछले साल 20 मई को हटाया गया। उनके स्थान पर आए प्रदीप अहलावत भी महज चार महीने तक रहे। अहलावत के बाद 30 सितंबर को अनिल नागर को एसडीएम लगाया गया। वह यहां करीब साढ़े तीन महीने रहे। अब प्रशांत अटकान यहां कितने दिन ठहरते हैं, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। प्रशासनिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उनका यहां से तबादला हो सकता है।

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