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इनेलो ने हर बार नए चेहरे पर खेला दांव

7 वर्ष पहले
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प्रमुखराजनीतिक दलों में शामिल इंडियन नेशनल लोकदल ने विधानसभा क्षेत्र में हर बार नए उम्मीदवार पर ही दांव खेला है। सियासी गलियारों में मौजूदा चुनाव में पार्टी की तरफ से किसी पुराने नेता को मैदान में उतारने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन आलाकमान ने आखिर में उमेद लोहान को टिकट देकर एक बार फिर नया चेहरा मैदान में उतारा है।

साल 2000 के चुनाव से पहले इनेलो का नाम लगभग हर चुनाव में अलग रहा। 2000 के चुनाव के बाद से पार्टी लगातार इनेलो के नाम पर ही राजनीति कर रही है और अपने उम्मीदवार मैदान में उतार रही है। इनेलो के गठन के बाद पार्टी ने सबसे पहले 2000 के चुनाव में सुभाष गोयल को टिकट दिया। गोयल चुनाव जीत गए और उन्हें पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में गठित सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया। 2005 में हुए अगले चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया और सत्यबाला मलिक को मैदान में उतारा। वे तीसरे स्थान पर रहीं। पिछले चुनाव में पार्टी ने कर्मचारी नेता धारा सिंह को मैदान में उतारा। सिंह हरियाणा कर्मचारी महासंघ से संबद्ध बिजली बोर्ड वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके थे, लेकिन चुनाव में उन्हें भी जीत हासिल नहीं हुई। सिंह इस बार भी टिकट के लिए मैदान में थे, लेकिन पार्टी ने फिर नए चेहरे उमेद लोहान पर दांव खेला है।

सिर्फ इनेलो ने ही उतारा महिला प्रत्याशी को

विधानसभाक्षेत्र का यह इतिहास रहा है कि यहां से इनेलो को छोड़कर किसी और दल ने कभी किसी महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा। पार्टी ने 2005 के चुनाव में सातबास क्षेत्र की सत्यबाला मलिक को पार्टी टिकट दिया। हालांकि इस बार कोई महिला नेता प्रमुख रूप से टिकट के दावेदारों में शामिल नहीं थीं।

मक्कड़ भी लड़ चुके इनके टिकट पर

वरिष्ठ नेता तीन बार विधायक रह चुके अमीर चंद मक्कड़ भी इस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उस समय पार्टी का नाम लोकदल था। मक्कड़ 1982 के चुनाव में पार्टी टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की। लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 1987 के चुनाव में देवी लाल का भाजपा से गठबंधन हुआ और यह सीट भाजपा के खाते में गई। 1991 और 1996 के चुनाव में पार्टी ने राममेहर मलिक को लगातार दो बार आजमाया, लेकिन वे दोनों बार तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि दोनों चुनावों में पार्टी के नाम अलग-अलग थे।