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जिसे लेने आया था ड्राइवर उसी बच्चे पर चढ़ा दी बस

7 वर्ष पहले
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इस्माइलाबाद। स्कूल बस चालक की लापरवाही से स्कूल का एक छात्र बस की चपेट में गया। छात्र की गंभीर हालत को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ भेज दिया गया। पता चलने पर पुलिस भी पहुंची। अब टीम उसके बयान लेने पीजीआई चंडीगढ़ गई है। डेफोडील पब्लिक स्कूल की बस गांव ठसका से विद्यार्थियों को लेने के लिए गई थी। घायल बच्चा भी इसी स्कूल का है। इसी बस से उसे स्कूल पहुंचना था। गांव ठसका वासी कुलदीप सिंह की पत्नी गुरप्रीत कौर अपने बेटे एकमजोत सिंह को बस में चढ़ाने के लिए आई। बस आगे निकल गई, छात्र पीछे रह गया। जैसे ही छात्र बस में सवार होने के लिए जाने लगा तो बस चालक ने बस पीछे करते हुए स्पीड बढ़ा दी। इससे एकमजोत बस की चपेट में गया। बुरी तरह से घायल एकमजोत को अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी गंभीर हालत देखते हुए अम्बाला भेज दिया गया। अम्बाला से उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया है।
इस मामले का पता चलते ही स्कूल प्रशासन भी मौके पर पहुंचा। स्कूल के चेयरमैन पीएल कोचर का कहना कि उनके स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे की बस छूट गई थी। उस बच्चे की मां ने उनके स्कूल की ही दूसरे रूट की बस में पिछले दरवाजे से चढ़ाने की कोशिश की। लेकिन बस चालक को नहीं पता था कि कोई महिला अपने बच्चे को बस में चढ़ा रही है। उसके बस चलाते ही बच्चा पीछे से टकरा गया, जिससे वह जख्मी हो गया।
भिभावक भी समझें जिम्मेदारी
अभिभावकोंको भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। वे बच्चों को खुद ही सावधानी से बसों में बिठाएं। इसमें जल्दबाजी करें। ही उन्हें स्कूल बस के इंतजार में अकेला छोड़ा जाए।
इस्माइलाबाद|सरकारी अस्पतालमें एंबुलेंस मिलने से प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते परिवार के सदस्य।

एंबुलेंस थी-पर नहीं आई
घायलछात्र को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों ने एंबुलेंस बुलाने के लिए 102 नंबर पर फोन किया। छात्र के पिता कुलदीप सिंह गांव वासी नितिन सैनी ने बताया कि वहां मौजूद कर्मचारी ने एंबुलेंस उपलब्ध होने की बात कह टरका दिया गया। जबकि उस समय पीएचसी में एंबुलेंस खड़ी थी। वहां उन्होंने एंबुलेंस चालक से साथ चलने की गुहार लगाई। लेकिन चालक ने 102 नंबर से सूचना आने का हवाला दिया। चालक ने कहा कि वे घायल बच्चे को यहां ले आएं। यहां से डाक्टर यदि रेफर करेंगे तो वह उसे ले जाएगा। इससे खफा ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि जब 102 नंबर पर फोन करके सारी स्थिति के बारे में बता दिया था। उसके बाद भी एंबुलेंस क्यों नहीं भेजी। उन्होंने कहा कि ऐसे में लोगों को इस एंबुलेंस सेवा का क्या फायदा है।

अवेयरनेसको लेकर चलाएंगे अभियान : डीसीसीजी रजनीकांथन का कहना है कि स्कूल बस चालक परिचालकों को अवेयर करने के लिए प्रशासन ने अभियान चलाया हुआ है। समय समय पर इनका निरीक्षण भी हो रहा है। बुधवार की घटना काफी गंभीर है। प्रशासन की तरफ से आरटीओ पुलिस बाकायदा रूटीन में अवेयरनेस प्रोग्राम चला रही है। स्कूल बसों को लेकर बाकायदा नियम कायदे बने हैं। वे गुरुवार या शुक्रवार को स्कूल संचालकों की मीटिंग बुला रहे हैं। इसके बाद चालकों परिचालकों के लिए वर्कशाप आदि का आयोजन किया जाएगा। उनके लाइसेंस आदि की जांच की जाएगी।
- स्कूल बस की चपेट में आया बच्चा, गंभीरावस्था में भेजा पीजीआई ।