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इस बार नहीं होगी धान की कस्टम मिलिंग : पपनेजा

7 वर्ष पहले
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इस्माइलाबाद|राइस मिलरएसोसिएशन ने अनाज मंडी में बैठक कर इस बार धान की कस्टम मिलिंग का कार्य नहीं करने का फैसला किया है। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के पूर्व प्रधान जगदीश पपनेजा ने की। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीति के कारण राइस मिलरों को यह निर्णय लेना पड़ा। जिस समय 2012-13 अक्टूबर में धान की खरीद शुरू हुई थी। उस समय सरकार ने कोई नीति राइस मिलर्स को नहीं बताई। सीजन के अंत में जब मिलर्स एजेंसियों से अपनी जमा सिक्योरिटी वापस लेने गए तो उनसे 57 पैसे प्रतिदिन कैरेट का किराया, पांच रुपए 84 पैसे प्रतिदिन के हिसाब से तरपाल का किराया काट लिया है। जोकि की सरासर गलत है। जबकि सरकार की तरफ मिलर्स का दो साल का चावल का किराया 2010-11 की बारदाने की खिसाई मंडी से राइस मिल तक का किराया उतराई लदाई जोकि एक-एक राइस मिल का लाखों रुपया बैठता है। उसका सरकार ने भुगतान नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीति के कारण राइस मिलर्स आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। इसलिए राइस मिलरों ने इस वर्ष सरकार द्वारा खरीदे गए धान की कस्टम मिलिंग करने का फैसला किया है। ताकि आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

जिला खाद्य पूर्ति अधिकारी जीपीएस सीकरी ने कहा कि सरकार के आदेशानुसार ही राइस मिलरों से कैरेट तरपाल का किराया काटा जा रहा है। उन्हें इस बारे में धान खरीदते समय अवगत करा दिया जाता है। बकाया बारे उन्होंने कहा कि मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी अगर किसी राइस मिलर्स की कोई समस्या है तो वह कार्यालय में आकर मुझसे मिल सकता है।