पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • एक्सपायर्ड चीनी पर अरारोट लगाकर करते थे सफेद

एक्सपायर्ड चीनी पर अरारोट लगाकर करते थे सफेद

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{प्रशासन के बड़े अफसरों ने दो प्लाइवुड फैक्ट्रियों पर डाली रेड

{फैक्ट्री संचालक पर नहीं था कोई भी लाइसेंस

{देर रात तक 4 हजार क्विंटल चीनी की तुलाई हो चुकी थी

भास्करन्यूज | यमुनानगर

वीरवारशामडीसी डॉक्टर एसएस फूलिया, एसपी, एसडीएम सहित एक दर्जन अधिकारी मिलावटखोरों तक पहुंचने के लिए निकले। टीम जगाधरी की एचपी इंडस्ट्री पहुंची। यहां पर 15 बैग यूरिया के मिले। वहीं मॉर्डन मिल प्लाइवुड में तीन बैग यूरिया के बरामद हुए। ये बैग सब्सिडी वाले थे। फैक्टरी संचालक प्लाई बनाने में इनका प्रयोग नहीं कर सकता।

यमुनानगर के इंडस्ट्री एरिया में संजीव कुमार राजीव कुमार फर्म के यहां गंदी चीनी मिली। जबकि ये चीनी बेची ही नहीं जा सकती। ये मिलावटी चीनी थी। साथ ही इसमें इंडस्ट्रियल मटीरियल भी मिला। यह देख अधिकारी दंग रहे गए। इस पर संज्ञान लेते हुए केस दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। एसएचओ राजीव मिगलानी ने बताया कि देर रात तक 4 हजार 7 क्विंटल चीनी की तुलाई हो चुकी थी। दाे लोगों पर विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कर लिया। टीम में एसपी डॉक्टर अरुण सिंह नेहरा, डीएसपी सुभाषचंद, डीडीए डॉक्टर आदित्य प्रताप, नापतौल इंस्पेक्टर आरके बाली निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे।

बड़ीमात्रा में प्रयोग होता है यूरिया: प्लाइवुडइंडस्ट्री में बड़ी मात्रा में किसानों के लिए सब्सिडी पर आने वाला यूरिया प्रयोग होता है। यूरिया से ग्लू बनाया जाता है। प्लाई को चिपकाने में इसे इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर ये केमिकल युक्त ग्लू मंगवाते हैं तो ये काफी महंगा है। ऐसे ही कमर्शियल यूरिया भी सब्सिडी यूरिया से तीन गुणा महंगा है। इस मामले में किसान यूनियन भी कई दफा शिकायत कर चुकी है।

कोईलाइसेंस नहीं: डीसीडॉक्टर एसएस फूलिया ने बताया कि जो चीनी मिली है वह सन 2013-14 में बनी हुई है। जबकि चीनी सिर्फ दो साल तक प्रयोग की जा सकती है। जहां पर रेड की गई है वहां पर चीनी को तो स्टॉक किया जा सकता था और ही बेचा जा सकता था। क्योंकि उसके पास चीनी बेचने का लाइसेंस ही नहीं है। यहां पर अन्य विभागों के भी लाइसेंस नहीं है। सामने आया है कि पुरानी चीनी को कैमिकल मिलाकर चमकाया जा रहा था। क्योंकि एक्सपायर होने के बाद चीनी का रंग काला पड़ जाता है और उसे अरारोट मिलाकर चीनी का रंग सफेद हो जाता है। जिसे महंगे दामों पर बेचते हैं। इस तरह की चीनी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। डीसी का कहना है कि इंडस्ट्री संचालकों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। जो चीनी नई मिली है कि उसे भी सैंपल के लिए भेजा जाएगा।

पैकिंग कर गुड़ नहीं बेच जा सकता

डीसीने बताया कि कार्रवाई के दौरान मौके से गुड़ की पेकिंग मिली है। इस तरह से पेकिंग कर बाजार में नहीं बेचा जा सकता। पेकिंग करने के लिए वेट, रेट, मेन्यूफेक्चरिंग, एक्सपायरी डेट सहित अन्य मानकों को पूरा करना होता है। लेकिन यहां पर कोई भी मानक पूरा नहीं था। यह भी पता चला है कि यह गुड़ भी एक्सपायरी चीनी से मिलाकर बनाया गया है।

कई फैक्ट्री बंद कर भागे

प्रशासनकी रेड की खबर पूरे इंडस्ट्री एरिया में फैल गई। जो गलत काम करने वाले इंडस्ट्री संचालक थे वे ताले लगाकर फरार हो गए। वहीं कुछ अंदर ही ताले लगाकर दुबके बैठे रहे। देर रात तक प्रशासन का काफिला इंडस्ट्री एरिया में रहा।

यमुनानगर | डीसीसमेत प्रशासन की टीम देर रात तक कार्रवाई में लगी रही।

यमुनानगर | येगंदी चीनी बाजार में जाने की तैयारी में थी। प्रशासन ने पकड़ी।

खबरें और भी हैं...