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सिख डीडीपीओ की अगुवाई में तड़के 4 बजे संतपुरा में सजाया श्री गुुरु ग्रंथ साहिब

5 वर्ष पहले
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गांवदौलतपुरमें शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विवाद शनिवार शाम तक चलता रहा। शुक्रवार रातभर गांव में झड़प का दौर चला। हालात बेकाबू हुए तो रात को ही गांव में डीसी डॉक्टर एसएस फूलिया और एसपी डॉक्टर अरुण नेहरा को जाना पड़ा। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। हालात और बिगड़े रात को ही प्रशासन ने प्लानिंग बनाई। सरस्वती कुटिया में रखे श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्याराें की अगुवाई में सुबह चार बजे संतपुरा गुरुद्वारा में सुशोभित कर दिया गया। इसका पता तो ग्रामीणों का चला और ही सिख समुदाय के लोगों को। छप्पर गुरुद्वारे मेें सिख समुदाय की मीटिंग में फैसला हुआ कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब को गांव से कहीं और सुशोभित किया जाएगा, लेकिन जब डीडीपीओ गगनदीप सिंह ने उन्हें बताया कि यह काम हमने कर दिया तो सिख समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और प्रशासन पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। शनिवार सुबह से दोपहर तक सिख समुदाय के लोगों और प्रशासन के बीच कई बार बातचीत हुई। इस बातचीत के दौरान समुदाय के लोगों में आपसी बहस भी हुई।

मामले को सुलझाने के लिए प्रशासन ने दोनों पक्षों को सुबह नौ बजे थाने में बुलाया था। लेकिन कोई पक्ष नहीं पहुंचा। सिख समुदाय के लोग छप्पर गुरुद्वारे में मीटिंग करते रहे तो दूसरे पक्ष के लोग गांव में जमे रहे।

ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें पुलिस प्रोटेक्शन दी जाए, तब वे थाने में जाएंगे। क्योंकि उन्हें जान का खतरा है। वहीं सिख समुदाय के लोग दोपहर करीब 12 बजे भारी संख्या में छप्पर थाने पहुंच गए। उनके साथ एसजीपीसी मेंबर बलदेव सिंह कायमपुरी पहुंचे थे। वहां पर एसडीएम जगाधरी प्रेमचंद और डीएसपी बिलासपुर सुभाषचंद पहुंचे और वे पांच लोगों को लेकर डीसी से बातचीत करने पहुंचे। सवा एक बजे यमुनानगर से डीसी, एसपी, एसडीएम और डीएसपी छप्पर पहुंचे। जो पांच सिख बातचीत के लिए डीसी आफिस गए थे उन्होंने फैसला सुनाया। लेकिन कुछ लोगों ने उसे मानने से मना कर दिया। इससे वहां पर बहस होती रही। इस दौरान वहां पर एचएसजीपीसी के महासचिव जोगा सिंह भी पहुंच गए। उन्होंने भी लोगों को समझाकर शांत करने का प्रयास किया।

कायमपुरीको भागना पड़ा मौके से : छप्परथाने में प्रशासन और विरोध कर रहे लोगों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। करीब दो बजे डीसी, एसपी और प्रशासन के अन्य अधिकारी थाने से बाहर आए। थाने के बाहर जुटे लोगों को फैसला सुनाने के लिए डीडीपीओ गगनदीप सिंह को आगे किया गया। क्योंकि वे सिख थे। उन्होंने सिखों को शांत करने के लिए आफिसर ड्यूटी से हटकर बहुत सी बातें की तो लोग उनकी बात मान गए। तभी एसजीपीसी मेंबर बलदेव सिंह को बोलने का मौका दिया गया। उन्होंने जैसे ही एसजीपीसी की बात की तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख कायमपुरी थाने के अंदर चले गए और वे वहां से थाने की बैक साइड से निकल गए। उनके जाने के बाद भी एक घंटे तक हंगामा होता रहा। अंत में भंभौल गुरुद्वारे के बाबा जसदीप सिंह ने बोलते हुए कहा कि 95 प्रतिशत सिख संगत की सहमति बनी थी कि गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश गांव से किसी अन्य जगह किया जाए। अकाल पूरक की इच्छा से अधिकारियों ने यह काम पंज प्यारों की अगुवाई में अलसुबह ही कर दिया। जोकि सराहनीय बात है। क्योंकि यहां पर हालात बिगड़ सकते थे। उनकी इस बात पर सभी ने संतुष्टि जताई और अपने-अपने घरों को लौट गए।

13 फरवरी को प्रकाशित खबर

इन पर हुआ केस दर्ज

छप्परपुलिस ने गांव मालीमाजरा निवासी जगजीत सिंह की शिकायत पर गांव दौलतपुर निवासी मामचंद, टिंकू, परमजीत धीमान, मोहित, राजू, खेमचंद, नीरज, दिनेश, शीशपाल, रघुबीर सहित दोनों पक्षों के 29 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

महिलाएं चूल्हा छोड़ डटी थीं डंडे लेकर चौराहों पर

यमुनानगर| जोमहिलाएं घरों के काम में व्यस्त रहती हैं। शनिवार को उनके हाथों में डंडे थे। कोई सरस्वती कुटिया में बैठी थी तो कोई घरों के बाहर। चाहे वह बुजुर्ग थी चाहे युवती। गांव दौलतपुर में शनिवार को इस तरह के हालात देखने को मिले। इस गांव में शुक्रवार की रात विवाद की रात रही। दो समुदायों के बीच मारपीट हुई और पत्थरबाजी भी हुई। सिख समुदाय के लोग जहां छप्पर थाने में जुटे थे वहीं गांव के लोग गांव में ही रहे। घरों में सन्नाटा छाया हुआ था। क्योंकि परिवार का हर सदस्य चौराहे पर जमा था। ग्रामीण बाहरी व्यक्ति को गांव में घुसने भी नहीं दे रहे थे। क्योंकि उन्हें ये ही डर था कि कहीं ग्रामीणों पर कोई हमला कर दे।

यमुनानगर | थानाछप्पर में संगत को संबोधित करते बाबा जसदीप। उनके साथ हैं डीडीपीओ गगनदीप सिंह (नीली पगड़ी में), डीसी डॉ. एसएस फुलिया, एसपी डॉ. अरुण नेहरा अन्य सिख पदाधिकारी। (दाएं) गांव दौलतपुर में अलग-अलग के धार्मिक ग्रंथ इस तरह सुशोभित किए हैं।

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