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दो साल में नहीं बना नत्थुवाल प्राइमरी स्कूल का भवन

5 वर्ष पहले
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गांवनत्थुवाल के राजकीय प्राइमरी स्कूल का भवन होने के कारण बच्चों को पिछले दो सालों से बिना भवन के ही काम चलाना पड़ रहा है। हालांकि स्कूल प्रशासन ने बच्चों को साथ लगते हाई स्कूल के एक कमरे में शिफ्ट कर काम चला रखा है, लेकिन एक कमरे में लग रही सभी पांचों कक्षाओं की पढ़ाई एक साथ कर पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ रहा है। वहीं बच्चों को पढ़ाने में अध्यापक भी परेशानी में है।

लोगबोले, समस्या भारी

गांववासी निशान सिंह, सुखचैन सिंह, अमरीक सिंह, बलजीत सिंह इत्यादि ने बताया कि गांव के राजकीय प्राइमरी स्कूल की इमारत कंडम होने के बाद करीब दो साल पहले इसे गिरा दिया गया था।

जिसके बाद सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्कूल के नए भवन का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है, लेकिन भवन का अभी तक तो निर्माण ही शुरू हो पाया है ओर ही इसको लेकर कोई विभागीय कार्रवाई ही की जा रही है। मामला विभागीय अधिकारियों की फाइलों में दबा हुआ है। लेकिन ऐसे में इसका प्रभाव बच्चों को पढ़ाई पर पड़ रहा है।

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा विपरीत असर

33 बच्चे पढ़ते हैं एक साथ

स्कूलमें पहली से पांचवीं तक के कुल 33 बच्चे हैं। जिसमें कक्षा पहली में 7, दूसरी में 5, तीसरी में 4, चौथी में 5 पांचवीं में 12 बच्चे हैं। सभी की पढ़ाई अलग-अलग करानी होती है। लेकिन जगह के अभाव में बच्चों को जहां पढ़ाई में दिक्कत रही है तो वहीं उन्हें पढ़ाने में लगे दो शिक्षकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में दो जेबीटी शिक्षक नियुक्त हैं। जिसमें एक चंद्रभान नियमित अध्यापक हैं तो दूसरे अतिथि अध्यापक मोती लाल हैं। अध्यापकों ने दबी जुबान में माना कि सभी बच्चों को एक साथ एक कमरे में बिठाना पड़ता है। जिससे उनकी पढ़ाई में दिक्कत आती है। स्कूल इंचार्ज चंद्र भान ने कहा कि प्राइमरी स्कूल के भवन को बनाने का प्रस्ताव शिक्षा अधिकारियों को भेजा हुआ है।

जाखल के खंड शिक्षा अधिकारी कृष्ण कुमार ने कहा कि समस्या उनके ध्यान में है। बच्चों को भवन के होने से परेशानियों रही हैं। लेकिन उन्होंने भवन को बनाए जाने की मांग संबंधित विभागीय अधिकारियों को भेजी हुई है। आगे की कार्रवाई सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों के अधीन है।

भवन होने के कारण एक साथ बैठकर पढ़ने को मजबूर विद्यार्थी।

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