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दुनिया में खत्म हो रहा है पड़ोस धर्म: मुनि

7 वर्ष पहले
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भागदौड़ की इस जिंदगी में इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि उसे अपने घर के साथ लगते घर में रहने वाले का भी कोई ज्ञान नहीं है। लेकिन इतनी बात जरूर याद रखना कि जीवन में हमेशा रिश्तेदारों से पहले पड़ोसी ही काम आते हैं।

यह बात एसएस जैन सभा स्थानक में संत आदीश मुनि ने रविवार को आयोजित पड़ौस दिवस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पड़ौस धर्म से अवगत कराते हुए कही। संत मुनि ने पड़ौस शब्द का शाब्दिक अर्थ समझाते हुए जीवन में पड़ोसियों की महत्व और एक अच्छा पड़ोसी बनने के लिए होने वाले गुणों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्कृत भाषा में पड़ौस का अर्थ पाश्व से लिया गया है। अर्थात पाश्व जो पास हो। हमारे आसपास जो भी रहते हैं उसे पड़ौस कहा जाता है। एक घर में जो रहते हैं उनमें मोह होता है। लेकिन जब यह मोह घर से बाहर के लोगों से होता है तो उसे प्रेम कहा जाता है। पड़ोसियों से प्रेम होता है। लेकिन दिलों में प्रेम खत्म होने से पड़ोसी धर्म खत्म हो रहा है। अच्छा पड़ोसी बनने के लिए खुद को अच्छा बनना जरूरी है। पड़ोसी के बच्चों से प्यार करें, पड़ोसी के दुख सुख में बराबर के भागीदार बनें।