- Hindi News
- पल्स पोलियो अभियान में डॉक्टरों की गाड़ी लगाई, घपला
पल्स पोलियो अभियान में डॉक्टरों की गाड़ी लगाई, घपला
सामुदायिकस्वास्थ्य केंद्र भूना में पल्स पोलियो अभियान के अंतिम चरण 19 जनवरी के दौरान चिकित्सकों उनके चहेतों ने गाड़ियां किराए पर चलाने के नाम पर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया है। जिसका खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता सुरजीत सिंह द्वारा मांगी गई आरटीआई रिपोर्ट में सामने आया है। इसे लेकर आरटीआई कार्यकर्ता ने विजिलेंस क्राइम ब्रांच को मामले की जांच करवाने की मांग की है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्ष 2013-14 के अंतिम चरण में पल्स पोलियो अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने दो राउंड के दौरान 56 गाड़ियां किराए पर ली हुई दिखाई गई है। आरटीआई सूचना आधी अधूरी देकर मामले पर लीपापोती करने की कोशिश करके घोटाले को छुपाने का प्रयास भी किया गया है।
दिलचस्प पहलू तो यह है कि अभियान में लगाई गई गाड़ी स्वास्थ्य केंद्र भूना के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. जेपी राजलीवाल ने भी निजी कार को किराए पर चलाई हुई दिखाई है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रति गाड़ी को 24 सौ रुपये किराया दिया हुआ है। कार का पंजीकरण डाॅ. राजलीवाल की प|ी के नाम है। आरटीआई सूचना में कार का किराया पवन कुमार नामक युवक को दिया हुआ दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त दर्जनों कारें शहर के गणमान्य व्यक्तियों की हैं। जो कभी किराए पर चली तक नहीं और अपने निजी कार्य के लिए इस्तेमाल करते हैं। परंतु स्वास्थ्य विभाग के कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से एवं जानपहचान का फायदा उठाकर उक्त कारों के नंबर रिकार्ड में चढ़ाकर राशि स्वयं हड़प गए। सूचना में आधा दर्जन ऐसे व्यक्ति भी हैं जिनकी गाड़ी का नंबर एवं नाम दर्ज किया हुआ है। जबकि उपरोक्त व्यक्तियों के पास गाड़ी मौजूद ही नहीं है। आरटीआई सूचना के बाद भ्रष्टाचार के खुलासे को लेकर उच्च स्तरीय जांच करवाकर भ्रष्टाचार में शामिल स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक खंड विस्तार अधिकारी मोहन लाल के खिलाफ हरियाणा विजिलेंस क्राइम ब्रांच पंचकुलां को पत्र भेजकर जांच की मांग की है।
संतोषजनक जवाब नहीं
इस बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भूना के वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. जेपी राजलीवाल ने कबूल किया है कि पल्स पोलियो अभियान में उनकी गाड़ी किराए पर चली थी। अभियान में स्टाफ का कोई भी व्यक्ति अपनी पर्सनल गाड़ी को भी किराए पर चला सकता है। अंतिम चरण में 56 गाड़ियां किराए पर कहां चली इसका कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे सके। खंड