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हर बच्चा खास, टीचर्स जिम्मेदारी समझंे

7 वर्ष पहले
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स्कूलमें आने वाला हर बच्चा खास होता है। बस उसे तराशने, उसकी मनोस्थिति जानने और उसका आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है। ये समूची जिम्मेदारी क्लास टीचर्स की होती है और इसे हर टीचर्स को समझना चाहिए। तभी सही मायनों में देश के इस भविष्य को शिक्षा के मंदिर में तैयार किया जा सकता है।

ये लब्बोलुआब रहा शनिवार को जिले में सहोदय द्वारा पहली बार किए गए टीचर्स ट्रेनिंग सेमिनार का। डीएच लारेंस स्कूल में हुए इस सेमिनार में जिले के कई सीबीएसई स्कूल के टीचर्स ने शिरकत की। इन्हें मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्त्रोत व्याख्याता कल्पना कपूर ने संबोधित किया।

इससे पूर्व सेमिनार का शुभारंभ सहोदय कॉॅम्प्लेक्स के चेयरमैन रमेश रोहिला डीएच लारेंस स्कूल की प्रिंसीपल सोनिया नागपाल ने मां सरस्वती समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके की। सेमिनार में डीपीएस बहादुरगढ़, सारथी स्कूल, एचआर ग्रीन फील्ड, ऑक्सफोर्ड स्कूल, स्कॉलर स्कूल, नवोदय कलोई, डीआरए. द्रोणाचार्य स्कूल से विभिन्न विषयों के टीचर्स प्रिंसीपल भाग लिया। व्याख्यान कल्पना कपूर ने कार्यक्रम में विभिन्न गतिविधियों का प्रयोग करते हुए अध्यापकों को रचनात्मक मूल्यांकन का गहनता से ज्ञान करवाया। साथ ही अध्यापन कार्य में आने वाली समस्याओं को सुना इन समस्याओं को रचनात्मक और तकनीक से सुलझाने का ज्ञान करवाया। आधुनिक शिक्षण के लिए यह कार्यक्रम काफी प्रभावशाली रहा। सेमिनार को दो भागों में विभाजित किया गया। प्रथम भाग में व्याख्याता ने रचनात्मक मूल्यांकन को समस्या और दूसरे भाग में टीचर्स समस्याओं को सुना उन्हें हल किया गया।

कठपुतलीके जरिए बताया बच्चों को आगे बढ़ाने का तरीका : सेमिनारमें खास पल तब आया जब मुख्य वक्ता ने कठपुतली के खेल के जरिए बताया कि किस प्रकार एक कलाकार अपनी उंगलियों में बंधी डोर के सहारे कठपुतलियों को गतिशील बनाकर है। खुद पर्दे के पीछे रहकर कठपुतलियों को सजीवता देता है। उसी प्रकार टीचर्स भी अपने स्टूडेंट्स से तालमेल बनाकर उसे जीवन में आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

झज्जर . डीएचलारेंस स्कूल में शिक्षकों को प्रशिक्षण देती कल्पना कपूर।