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आरोपी एसडीओ 10 दिन बाद भी विजिलेंस की गिरफ्त से दूर
प्रदूषणनियंत्रण बोर्ड में विजिलेंस द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद अब अंदर की बातें बाहर आने लगी हैं। हालत यह हो गई है कि बोर्ड के रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं। रूटीन काम हो या फिर प्रदूषण जांच के लिए सैंपल पास करने का मामला। इन सब कामों के लिए पैसा लिया जाता है।
बता दें कि 5 दिसंबर को सांपला के दहकौरा क्षेत्र में बनी प्लाई फैक्टरी के मालिक आरके मित्तल की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ गौरव कक्कड़ वहां के क्लर्क श्रीभगवान के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया था। क्लर्क को 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था, जबकि गौरव कक्कड़ विजिलेंस छापे की इस सूचना के बाद फरार हो गया। उसने 19 हजार रुपए की रिश्वत ली थी। वह कार्यालय से गैरहाजिर रहा। वहीं दूसरी ओर एसडीओ को बोर्ड ने सस्पेंड कर दिया है। विजिलेंस को अब गौरव कक्कड़ की तलाश है।
आरके मित्तल की शिकायत में कई बातें चौकाने वाली हैं। दरअसल बोर्ड की नई नीति के मुताबिक ऑरेंज श्रेणी में आने वाली यूनिटों को तीन साल में एक बार फैक्टरी चलाने की कंसेंट लेनी होती है, जबकि पहले यह व्यवस्था साल में एक बार की होती थी। इसको निर्धारित फीस के साथ ऑनलाइन भरा जाता है। उद्योगपति मित्तल ने बोर्ड की व्यवस्था के तहत इसको भरा था और बाद में इसकी हार्ड कॉपी को देने के लिए बोर्ड के कार्यालय में पहुंचा था। आरोप है कि यहां उनकी कंसेंट के लिए दी गई प्रतियों को एसडीओ गौरव कक्कड़ ने यह कहते हुए लेने से मनाकर दिया। दो बार गुहार करने के बाद मित्तल से चाय पिलाकर काम की नाराजगी दूर करने की बात कही गई अौर फीस भी बात दी गई।
कंसेंट की राशि तय होने के बाद फैक्टरी में सैंपल लेने के लिए पहुंचे एसडीओ मित्तल का आरोप है कि कंसेंट के लिए राशि तय होने के बाद भी एसडीओ अपनी टीम के साथ वहां लगी चमनी और बॉयलर के सैंपल लेने के लिए पहुंच गए। इसके लिए उन्होंने अपने मोबाइल में फोटो भी लिए। बाद में इस बात का दबाव बनाया कि उनके यहां लगा एपीसीएम सिस्टम प्रदूषण रोकने के लिए बने दूसरे सिस्टम ठीक नहीं हैं। बाद में कंसेंट, लिए गए प्रदूषण के सैंपल हिसार की लैंब से पास करने के लिए 35 हजार रुपए की मांग की गई, लेकिन विशेष गुहार करने पर मामला 25 हजार में तय हुआ।
मित्तल ने पहले 15 हजार रुपए दिए तो एसडीओ ने कहा कि यह राशि उनके पद की हैसियत के मुताबिक