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मरीजों को परामर्श तो मिलता है पर दवाएं नहीं
शहर के 100 बेड वाले अस्पताल में रोजाना 500 से 700 के करीब मरीज विभिन्न ओपीडी में आते हैं। मरीजों की तादात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक की बजाए तीन दवा खिड़की खुलवा दी हैं। अब यहां खिड़कियां तो हैं, पर जरूरी दवाएं ही नहीं हैं। अब सुविधा भी बौनी साबित हो रही है।
इन दिनों झज्जर के सिविल अस्पताल में यही देखने को मिल रहा है। मौसमी सीजन को देखते हुए लोग सर्दी खांसी बुखार से पीड़ित होकर रहे हैं। ओपीडी के चिकित्सक मरीजों को बेहतर परामर्श देकर उनकी पर्ची पर दवाएं तो लिख रहे हैं, लेकिन दवा खिड़की तक आते-आते मरीज का मर्ज तब और बढ़ जाता है जब उन्हें बुखार के लिए सबसे ज्यादा जरूरी पैरासीटामोल ही अस्पताल से नहीं मिलती। सूत्रों ने बताया कि इसका स्टॉक पिछले एक माह से खत्म है। बताया गया कि बच्चों की ये दवा तो मौजूद है, लेकिन बड़ों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। इसी प्रकार हर कैटेगरी की कफ सिरप का तो बीते दो माह से संकट चला रहा है। ऐसे में मरीजों को सिविल अस्पताल की चारदीवारी से सटे निजी मेडिकल स्टोर की ओर रुख करना पड़ रहा है।
हरमाह 300 जांच होती है एचआईवी की
सिविलअस्पताल की विभिन्न ओपीडी द्वारा माह में करीब 300 मरीजों की एचआईवी जांच होती है। खासकर गर्भवती महिला और सर्जरी केस में ये जांच जरूरी होती है। अब हालात ये हैं कि बीते एक माह से अस्पताल के पास एचआईवी किट ही नहीं है। निजी लैब अस्पताल में ये जांच 138 रुपए में होती है। ऐसे में मरीजों को ये जांच बाहर जाकर करानी पड़ रही है।
{विभिन्न ओपीडी में रोजाना आते हैं 500 से 700 मरीज
{अस्पताल में एक माह से नहीं है दवा का स्टॉक
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने जताया रोष
सिविलअस्पताल में दवाओं की कमी होने पर मरीजों के साथ-साथ अस्पताल में ड्यूटी रत डाक्टर्स ने भी रोष जताया है। डॉ. गुलशन कुमार का कहना है कि हैरानी की बात है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने की बात कहती है और जिला मुख्यालय के प्रमुख अस्पताल में ही जरूरी दवाओं की कमी है। डॉ. गुलशन ने कहा कि इसके विरोध में उनकी एसोसिएशन डॉ. मिशनरीज एम्पलाइज स्टूडेंट्स एंड डिप्राईव्ड पीपल्ज सोसायटी द्वारा जल्द ही सीएमओ को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
^अगर स्टाक में पैरासीटामोल नहीं है तो उसका विकल्प हम मरीजों को देते हैं। फिर भी चेक कराया जाएगा कि ये दवा और कफ सिरप कब से कमी है। एचआईवी किट के स्टाक के बारे में मुझे सूचना नहीं है इसकी भी जांच कराई जाएगी। -डॉ.रमेश धनखड़, सीएमओ झज्जर।
मजबूरी में निजी लैब में देना पड़ेंगे पैसे
एमपीमाजरा निवासी शक्ति सिंह के पैर का ऑप्रेशन होना है। कई दिन से वो सिविल अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। चिकित्सक ने सर्जरी से पहले एचआईवी टेस्ट कराकर रिपोर्ट लाने को कहा है। ये उसकी परामर्श पर्चे पर भी लिखा है। शनिवार को भी शक्ति सिंह इसके लिए सिविल अस्पताल आया। यहां वो जैसे ही टीवी वार्ड से होता हुआ एचआईवी शाखा में पहुंचा तो उसे कहा गया कि ये टेस्ट नहीं हो सकता। किट उपलब्ध नहीं है। तब मीडिया कर्मियों को शक्ति ने बताया कि वो अगर एक बार निजी अस्पताल में चला गया तो और अन्य टेस्ट बताकर उससे पैसे ऐंठने का काम होगा, लेकिन उसे ये सब करना पड़ेगा।
मरीज शक्ति।
झज्जर. सिविलअस्पताल के टीवी वार्ड के अंदर ही होती है एचआईवी शाखा।