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गेहूं धान की खेती की तुलना में मत्स्य पालन से है मुनाफा
डीसी डॉ. अंशज सिंह ने कहा कि किसानों की आमदनी में इजाफा करने की दिशा में मत्स्य पालन परंपरागत कृषि की तुलना में एक कारगर विकल्प है। मत्स्य पालन सेम ग्रस्त भूमि के साथ-साथ खारे पानी वाले क्षेत्रों में भी आसानी से किया जा सकता है। परंपरागत गेहूं धान की खेती की तुलना में मत्स्य पालन मुनाफे का सौदा साबित होता है। उन्होंने आज यह बात जिले में मत्स्य पालन विभाग की ओर से जनवरी माह की प्रगति रिपोर्ट घोषित करते हुए दी। झज्जर जिले में दिसंबर माह की तुलना में जनवरी में किसानों ने मत्स्य पालन को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाई है।
दिसंबर माह के दौरान जिले में 6 हेक्टेयर भूमि पर नए तालाब खोदे गए थे, जबकि जनवरी माह के दौरान तालाब खोदने की उपलब्धि 7.3 हेक्टेयर पर जा पहुंची। झज्जर जिले में इस समय 393 तालाबों में मत्स्य पालन किया जा रहा है। जिले की प्रमुख रबी की फसलों का सीजन होने के बावजूद जनवरी माह में पांच नए तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य आरंभ हुआ।
झज्जर जिले में मत्स्य पालन के जरिए 186 लोगों को मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला है। जिससे जिले का मत्स्य उत्पादन जनवरी माह तक 7150 टन पर पहुंच गया। इस उत्पादन में अकेले जनवरी माह में बाजार को 1718 टन मछली उपलब्ध कराई गई। इस अवधि के दौरान झज्जर जिले के 11.4 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पंचायती तालाबों को भी मत्स्य पालन के लिए लीज पर दिया गया।