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गोरिया से झज्जर माह में दो बार चलती है बस, ग्रामीणों में रोष
मातनहेलब्लॉक के गांव गोरिया से झज्जर जाने वाले मार्ग पर कोई भी सरकारी निजी बस सेवा होने से क्षेत्र के ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कर्मचारियों विद्यार्थियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
ग्रामीण सोनू, विकास, रोहित, अंकित, जयलाल, सुरेश कुमार ने बताया कि गांव गोरिया झज्जर जिले के आखिरी छोर पर बसा हुआ है। इसके आगे रेवाड़ी की सीमा आरंभ होती है। कहने को तो सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन गांव गोरिया में आने जाने का कोई साधन नहीं है। तो हरियाणा रोडवेज की बस और ही निजी परिवहन समिति की बस भी नहीं चलती है। बार-बार इसकी शिकायत संबंधित विभाग को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी किसी ने भी नहीं सुनी है। सात हजार आबादी वाला यह गांव और भी मूल भूत सुविधाओं से वंचित है। इसके चलते दूर-दराज क्षेत्रों में नौकारी करने वाले कर्मचारियों स्कूल कालेजों में जाने वाले विद्यार्थियों को भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री जयलाल ने बताया कि बस महीने में दो माह में एक या दो बार चलती है परिवहन विभाग के अधिकारी को लिखित मौखिक शिकायत दे चुके हैं, लेकिन शिकायत करने के बाद कुछ दिन बस चला देते है। माह में एक या दो दिन चलती है, इसके बाद फिर व्यवस्था चरमरा जाती है।
यात्री सुरेश कुमार ने कहा कि गांव गोरिया से झज्जर जाने वाले इस मार्ग पर कोई रोडवेज बस नहीं चलती है। ऐसे में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है किसी को साल्हावास काम के लिए जाना पड़ सकता है, तो वो उसका सारा दिन खराब हो जाता है।
तीन किलोमीटर की दूरी देती है आफत
तीनकिलोमीटर से भी ज्यादा दूरी पैदल तय कर खानपुर खुर्दे तक अवैध वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके कारण उनका काफी ज्यादा समय आर्थिक नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार वे कई अधिकारियों से बस चलाए जाने की मांग कर चुके है लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का कोई समाधान नही किया जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से मांग की है कि उक्त मांग पर बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए।