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झज्जर के पहलवानों ने चोट के बाद भी प्रदेश को दिलाए पदक

6 वर्ष पहले
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केरलमें वर्ष 2015 के हाल ही में संपन्न हुए नेशनल गेम्स में हरियाणा के पहलवानों का दमखम देशभर ने देखा। शत प्रतिशत मेडल हरियाणा के खाते में आए। इनमें झज्जर ने भी अपना दम दिखाया। झज्जर के दो पहलवानों खुड्डन के सोनू पुनिया और डाबला के मनोज धनखड़ ने हरियाणा को मेडल दिलाए। मनोज ने गोल्ड जीता तो सोनू ने भी ब्रांज मेडल जीतकर अपना दम दिखाया। पदक जीतने के बाद इन दोनों ही पहलवानों से जब दैनिक भास्कर से अनुभव शेयर किए तब पता चला कि ये पहलवान शारीरिक चोट से जूझ रहे थे, लेकिन कुश्ती के जज्बे और हरियाणा का मान केरल में रखने के लिए दोनों आराम छोड़ रेसलिंग रिंग में उतरे और मेडल जीतकर लाए।

पहलवान सोनू की तक उपलब्धि

{वर्ष२०१२ चंदगीराम अखाड़ा दिल्ली गोल्ड कप में गोल्ड।

{वर्ष २०१३ जूनियर नेशनल चैंपियनशिप चंडीगढ़ में गोल्ड।

{वर्ष २०१३ जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप बुलगारिया में पार्टीसिपेट।

{वर्ष २०१४ यू्नियन नेशनल चैंपियनशिप झारखंड में गोल्ड।

{वर्ष २०१४ जूनियर एशिया चैंपियनशिप मंगोलिया में पार्टीसिपेट।

{वर्ष २०१४ सीनियर नेशनल चैंपियनशिप यूपी में ब्रांज।

{वर्ष २०१५ नेशनल गेम्स केरल में १३० केजी में गोल्ड।

पहलवान सोनू का फैक्ट फिगर

उम्र : 22

सर्विस: अभीनहीं

गांव: खुड्डन,झज्जर

पिता: लीलाराम

माता: रानीदेवी

शिक्षा: पल्सटू

भाई: सचिन

बहन:सुमन

आइडियल: पितालीलाराम, कोच रणवीर ढाका

हॉबीज: रीडिंग

पसंदीदाफिल्म : चकदे इंडिया

पसंदीदाअभिनेता: सन्नीदेओल

पसंदीदाअभिनेत्री : कैटरीनाकैफ

अब तैयारी ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने की सोनू ने बताया कि अब वो ब्राजील के रियो शहर में होने वाले आेलंपिंक 2016 में इंडिया की ओर से जाने वाली टीम का हिस्सा बनना चाहता है। इसके लिए वो ओलंपिक क्वालीफाई की तैयारी में जुटा है।

कंधे की चोट के बाद भी सपनों पूरा करने जिद

खुड्डनके 22 वर्षीय पहलवान सोनू पुनिया के पिता लीलाराम अपने समय के मशहूर पहलवान रहे हैं। घर में पहलवानी परंपरा को देख सोनू पिछले 8 साल से कुश्ती की रिंग में उतरा। पिता परिवार की जिम्मेदारी के चलते कुश्ती में नाम नहीं कमा सके, लेकिन उनकी इच्छा है बेटा विश्व स्तर का बेहतरीन पहलवान बने। सोनू की जिद पिता के इसी सपनों को पूरा करने की है। सोनू पूिनया ने बताया िक वह अपने पिता की हर इच्छा को पूरा करना चाहता है। वर्ष 2010 से वे जूनियर मुकाबले में भाग लेता रहा है। 2014 नेशनल गेम्स यूपी में वो पहली बार सीनियर रेसलिंग में आया। वह भी 130 किलो वजन में। यहां उसने ब्रांज जीतकर अपने को सिद्ध किया। वर्ष 2015 केरल के नेशनल गेम्स से पहले सोनू को कंधे में गंभीर इंजरी हुई। चार महीने उसका इलाज मुंबई में चला। कुछ ठीक हुआ तो कोच ने झिझकते हुए नेशनल गेम्स की बात कही। सोनू ने अपने दूसरे में नेशनल गेम्स में भी ब्रांच जीता।

अब तक का ये सफर है मनोज धनखड़ का

{2003में नेशनल चैंपियनशिप केरल, गोल्ड।

{2006 एशियन गेम्स, कतर दोहा, पार्टीसिपेट।

{2007 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, कनाडा, गोल्ड।

{2009 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, जालंधर गोल्ड।

{2010 कॉमनवेल्थ गेम्स नई दिल्ली, सिल्वर।

{2011 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, आस्ट्रेलिया, गोल्ड।

{2012 ब्राजील कप, रियो गोल्ड।

{2013 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, साउथ अफ्रीका, गोल्ड।

{2014 एशियन चैंपियनशिप, कजाकिस्तान, ब्रांज।

{2015 नेशनल गेम्स केरल, गोल्ड।

अंतरराष्ट्रीय पहलवान मनोज का फैक्ट फिगर

उम्र : 29

सर्विस: इनकमटैक्स अफसर, दिल्ली।

गांव: डावला,झज्जर।

पिता: चंद्रभान

माता: सावित्री

शिक्षा: ग्रेजुएशन,एमडीयू।

भाई: कैप्टनविनोद धनखड़।

बहन: मनीषा,बबीता।

आइडियल: ओलंपियनयोगेश्वर दत्त

हॉबीज: ड्राइविंग,बैडमिंटन, फुटबॉल।

पसंदीदाफिल्म : चकदे इंडिया।

पसंदीदाअभिनेता: रणदीपहुड्डा।

पसंदीदाअभिनेत्री : जैकलीनफर्नांडीज।

घुटने में चोट लगी, फिर भी खेले और जीता गोल्ड

डावलाके 29 वर्षीय पहलवान मनोज धनखड़ विगत 13 साल से कुश्ती रिंग में है। उनके नाम से दो एशियन चैँपियनशिप पांच कॉमनवेल्थ मुकाबलों में देश को पदक दिलाना रहा है। अपने 13 साल के करिअर में दस से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने वाले मनोज का ये कुश्ती प्रेम ही है कि वो डोमेस्टिक मुकाबले के प्रति अब भी जुनून बना हुआ है। केरल नेशनल गेम्स से पहले उनके घुटने में चोट लगी। कोच नरेंद्र सहरावत ने मनोज को नेशनल गेम्स में नहीं जाने की सलाह दी। हालांकि मनोज ने अपने कोच को भरोसा दिलाया कि वो फिट है। मनोज का फाइनल मुकाबला दिल्ली के पहलवान से हुआ तब रिंग में मनोज घुटने की चोट से लड़खड़ाया, लेकिन अपनी इच्छा शक्ति और दमदार खेल की बदौलत मनोज गोल्ड लेकर ही रिंग से बाहर आया। अब तैयारी एशियन कॉमनवेल्थ की राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने दांव-पेंच भरे खेल की बदौलत देश को पदक दिलाने वाले मनोज धनखड़ की नजर अब वर्ष 2015 में एशियन चैंपियनशिप कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने की है।