- Hindi News
- आयुष विंग में मरीजों की गोपनीयता पर ध्यान नहीं
आयुष विंग में मरीजों की गोपनीयता पर ध्यान नहीं
जिलेकी आयुष विंग में सुविधाओं की दरकार है। हालत यह है कि यहां पर मरीज से लेकर चिकित्सकों तक के बैठने की ठीक से व्यवस्था नहीं है। उपचार के दौरान महिला पुरुष मरीज की जो गोपनीयता होनी चाहिए, उसको भी बनाने के लिए पर्दे तानने पड़ रहे हैं। इस समस्या से जहां मरीजों को दो चार होना पड़ता है। वहीं स्टाफ भी जगह की कमी को महसूस कर रहा है।
बता दें कि झज्जर जिले के सिविल अस्पताल परिसर में आयुष की विंग है। इसके माध्यम से मरीजों का पंचकर्म विधि के द्वारा उपचार किया जाता है। दरअसल यह उपचार की वह विधि है, जबकि किसी व्यक्ति की बीमारी दवाइयों द्वारा ठीक नहीं होती है तो उसको पंचकर्म द्वारा पूर्ण रूप से ठीक किया जाता है। इसके लिए पहले मरीज काउंसलिंग होती है। बाद में उसका बीमारी के हिसाब से 7, 14 या फिर 21 दिन का कोर्स कराया जाता है। इस उपचार के दौरान सबसे ध्यान रखने की बात यह होती है कि इसके लिए शांत माहौल होना चाहिए। इस प्रकार की सुविधा मरीजों को जगह अभाव के कारण नहीं मिलती है। हालत यह है कि यहां पर उपचार के लिए महिला और पुरुष के साथ-साथ डॉक्टर द्वारा मरीजों को देखने की व्यवस्था एक ही कक्ष में चल रही है। हालत यह है कि जगह अभाव में उपचार के लिए काम आना वाला आवश्यक सामान भी बाहर गैलरी में रखना पड़ रहा है, जबकि जानकार लोगों का कहना है कि पंचकर्म के लिए मरीजों के उपचार के लिए कम से एक एक अलग हॉल होने चाहिए। वहीं, चिकित्सक को रूटीन में आने वाले मरीजों को अलग से बैठकर देखना चाहिए। चूंकि इस दौरान उनको काउंसलिंग भी देनी होती है। इसके लिए एक बेहतर माहौल चाहिए। प्रतिदिन 40 से 50 नए मरीज पहुंचते हैं। इनको यहां अपनी बारी के इंतजार से लेकर उपचार कराने के दौरान तक एक भीड़ वाले माहौल से गुजरना होता है। ऐसी स्थिति में यहां पंचकर्म के मूल सिद्धांत पर ही प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
परेशानी
झज्जर.
सिविल
अस्पताल
परिसर के
आयुष िवंग में
पंचकर्म पद्धति से
इलाज
करते
चिकित्सक।
^उपचार प्रक्रिया में आने वाली असुविधाओं के बारे में विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया है। उन्होंने बिंदु दर बिंदु रिपोर्ट मांगी है। नए बजट में इसकी व्यवस्था होने की उम्मीद है। कम सुविधाओं के बावजूद मरीजों यहां के उपचार से संतुष्ट हैं। किसी को दिक्कत नहीं आने दी जा रही है। डाॅ.ज्योति चिकित्सक, पंचकर्मझज्जर।