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कष्ट में रहकर भी जिम्मेदारी से नहीं मोड़ा मुंह
झज्जरसिविल अस्पताल के ओपीडी वार्ड के गेट पर पिछले 10 दिनों से एक कार आकर रुकती है। इसका इंजन बंद होते ही कार का शीशा खुलता है और ड्राइविंग सीट की ओर ओपीडी के मरीज अपनी फाइल और दवा पर्ची लेकर बढ़ जाते हैं।
कार में मौजूद यह शख्स डाॅ . संजीव हसीजा हैं, जो इन दिनों कार में ही ओपीडी चला रहे हैं। शरीर की नसों में खून का थक्का जमने वाली बीमारी से जूझ रहे डाॅ . संजीव खुद कष्ट झेलकर मरीजों का कष्ट दूर कर रहे हैं। उनकी सेवा पर हर कोई उन्हें भगवान का अवतार मानकर भगवान से उनके जल्द ही स्वस्थ होने की कामना करता रहता है। डॉ. संजीव की इस प्रैक्टिस पर अस्पताल के चिकित्सक भी उन्हें सेल्यूट करते हैं। डाॅ. संजीव कहते हैं कि वे घर में बेड पर पड़े-पड़े भी क्या करेंगे। लिहाजा ओपीडी समय में वे अस्पताल जाते हैं। यहां कम से कम मरीज तो परेशानी नहीं उठाते। बता दें कि डाॅ. संजीव हार्ट के मरीजों को भी देखने वाले सिविल अस्पताल के एकमात्र चिकित्सक हैं।
ब्रोंटाइटिस्ट बीमारी है डाॅ. हसीजा को
डाॅ. संजीव हसीजा को पिछले कुछ समय से ब्रोंटाइटिस्ट नामक बीमारी है। इसमें शरीर की नसों में खून का थक्का जमना शुरू हो जाता है। नसों में प्रॉपर रक्त का संचार नहीं हो पाता है। इससे शरीर के अंग गलने लगते हैं। इसका असर उनकी उंगलियों में देखा जा सकता है। डाॅ . संजीव का इलाज चल रहा है।
कुछसाल पहले हादसे में हो गए थे विकलांग
डाॅ.संजीव हसीजा को कुदरत ने समाजसेवा करने के जुनून के साथ-साथ शारीरिक कष्ट भी समय-समय पर दिए हैं। फिर भी वे अपना काम बिना किसी दुख और परेशानी के करते चले जाते हैं। डॉ. हसीजा का कुछ समय पहले सड़क हादसे में कूल्हे की हड्डी में चोट लगी थी। लिहाजा वे सामान्य इंसान की तरह दोनों पैर से चल नहीं पाते। उन्हें सिंगल वॉकर का सहारा लेना पड़ता है।
^डॉ. हसीजा अपने काम के प्रति समर्पित इंसान हैं। वो खुद शारीरिक कष्ट झेलकर सिविल अस्पताल के मरीजों को देखने जाते हैं। ये बहुत बड़ी बात है। हमने उन्हें आराम करने को कहा है, लेकिन वो फिर भी अस्पताल कैंपस में रहे हैं। उनकी यह वर्किंग दूसरों के लिए प्रेरणा है। डॉ.सतेंद्र वशिष्ठ, एसएमओझज्जर।
झज्जर. बीमारहोने के बावजूद मरीजों को चेक करते डाॅ. हसीजा।