हमारे बच्चों से भेदभाव क्यों
झज्जरजिले में भी सभी 516 सरकारी स्कूलों में पेट के कीड़े मारने वाली दवा बच्चों को पिलाने का अभियान शुरू हुआ। पहले दिन सभी बच्चों को यह दवा दी गई। क्योंकि सरकारी तौर पर इस अभियान का प्रचार काफी दिनों से किया जा रहा था। ऐसे में निजी स्कूलों के संचालकों सवाल उठाया है कि स्वास्थ्य विभाग सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों मे भी यह अभियान चलाए।
हालांकि जिले के अधिकारियों को तर्क है कि निजी स्कूलों में सक्षम परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं वो अपने बच्चों का स्वास्थ्य की देखभाल कर सकते हैं। लिहाजा यह अभियान सिर्फ सरकारी स्कूलों के लिए ही है। अफसरों के इस तर्क पर संचालकों का भी कहना है कि सरकार सभी वर्गों को दवाएं मुफ्त में देती है तो कीड़े मारने की दवा क्यों नहीं दी जा रही।
बच्चोंका कितना खून बढ़ा होगी जांच
कीड़ेमारने की दवा खिलाने से पहले जिला स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों में खून की कमी को देखते हुए आयरन की गोली खिलाने का अभियान चलाया था। जनवरी 2014 से दिसंबर तक ये अभियान चला। इसके तहत हर सप्ताह खुराक दी गई। अब जब मंगलवार को राजकीय कन्या स्कूल में कृमि मुक्त अभियान की शुरुआत हुई तब मुख्य अतिथि एडीसी पुष्पेंद्र चौहान ने कहा कि आयरन गोली का कितना असर बच्चों में हुआ इसकी भी जांच स्वास्थ्य विभाग कराए। एडीसी के इस आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग अब बच्चों के खून के नमूने लेकर उनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा चेक करेगा।
58हजार 216 बच्चों को दी दवा
राष्ट्रीयकृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत मंगलवार को झज्जर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय परिसर से विद्यार्थियों को एल्बेंडाजोल नामक दवा देकर कार्यक्रम का शुभारंभ अतिरिक्त उपायुक्त पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने किया। उन्होंने बच्चों को दवा देकर उन्हें स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की अपील भी की। चौहान ने कहा कि आज 6 से 19 वर्ष तक की आयु के बच्चों को पेट के कीड़े साफ करने की दवा दी जा रही है और विभाग के लक्ष्य के मुताबिक करीब 76 हजार बच्चों को आज दवा दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों, सरकारी विद्यालयों मान्यता प्राप्त विद्यालयों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता पहुंचकर बच्चों को स्वयं दवा दे रहे हैं। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ.रमेश धनखड़ ने बताया कि मंगलवार को जिले में सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के 6 से 19 आयु वर्ग के विद्यार्थियों को दवा दी जा रही है तथा शेष बचे हुए बच्चों को 13 फरवरी को भी दवा दी जाएगी।
निजी स्कूल संचालक बोले, यहां भी हैं गरीब बच्चे
प्राइवेटस्कूल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र जून का कहना है कि झज्जर की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्र में हैं। अधिकांश निजी स्कूल गां-गांव में है। ऐसे में सरकारी स्कूल की बजाए स्वास्थ्य विभाग का इस तरह का दवा वितरण अभियान निजी स्कूल में चलना चाहिए। निजी स्कूल में भी कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। वहीं सीबीएसई सहोदया संस्था के चेयरमैन रमेश रो हिला ने भी माना कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी जिले के सभी बच्चों के स्वास्थ्य की होना चाहिए। निजी स्कूल समय-समय पर हेल्थ कैंप लगाते हैं,लेकिन स्वास्थ्य विभाग भी बच्चों में खून की कमी की जांच स्कूल में कराए,ताकि फिर हम बच्चों को दवा दिला सकें।
^निजी स्कूल में सक्षम परिवारों के बच्चे पढऩे आते हैं। लिहाजा पहले सरकारी स्कूल में आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। निजी स्कूल संचालकों को चाहिए कि वे भी अपने यहां पढऩे वाले बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए उनकी जांच कराएं,जो भी मदद होगी वो प्रशासन द्वारा की जाएगी। -डॉ.पुष्पेंद्र सिंह चौहान,एडीसी।
^निजीस्कूल अपने यहां पढऩे वाले बच्चों को अगर कीड़े मारने की दवा या अन्य सरकारी योजना के तहत दवा खिलाना चाहते हैं तो उन्हें सरकारी रेट पर दवाई उपलब्ध करा दी जाएगी। -डॉ.रमेश धनखड़,सीएमओ।
झज्जर. रावमािवद्यालय में छात्राओं को अल्बेंडाजोल की गोली देते एडीसी पुष्पेंद्र िसंह चौहान अन्य।