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हाथ कटा, पर जीवन की रफ्तार नहीं होने दी कम
अब राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल बनकर बच्चों को दे रहे हैं जीवन जीने का संदेश
भास्करन्यूज | झज्जर
येहैं धर्मवीर सिंह। उम्र 50 साल है और जोश जवानों जैसा। सुरखपुर के राजकीय मिडल स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में जाने-जाते हैं।
धर्मवीर जब पांचवीं कक्षा में थे तब गन्ने की मशीन में हाथ आने से उनका दायां हाथ कट गया। धर्मवीर दाएं हाथ से ही सभी काम करते थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बाएं हाथ को हमसफर बना लिया। वे भी अन्य विकलांगों की तरह मायूसी भरा जीवन बिता सकते थे, लेकिन विकलांगता शब्द उन्होंने अपने जीवन में नहीं आने दिया। यही बात वे बच्चों को स्कूल घर में सिखा रहे हैं। धर्मवीर ने पांचवीं के बाद की सभी कक्षाएं बाएं हाथ से लेखनी सीखकर की। बीए और बीएड तक पढ़ाई की और हिम्मत और जज्बे के बूते पर सरकारी टीचर लगे इसके बाद प्रिंसिपल के रूप में पदोन्नत हुए।
बाइक, कार कुश्ती से हो गए दूर
घरसे स्कूल साइकिल तक आने वाले धर्मवीर के इस बात का मलाल जरूर है कि वो बाइक और कार नहीं चला सकते। धर्मवीर ने बताया कि बचपन में उनकी इच्छा थी कि वे भी तेज बाइक चलाएं, कार चलाएं, लेकिन ट्रैफिक के रूल आड़े रहे हैं और वो भी उनकी पालना करते हैं। बचपन में साइकिल सीखी थी जो अब तक काम रही है। धर्मवीर ने बताया कि इसी प्रकार वो बचपन में कुश्ती बहुत खेलते थे इसी में अपना करियर बनाना चाहते थे, लेकिन हाथ कटने के बाद वे अपने इस प्रिय खेल से भी दूर हो गए हैं।
स्कूल ही नहीं, पूरे कुनबे के हैं प्रेरणा स्त्रोत
धर्मवीरसिंह अपने राजकीय स्कूल के बच्चों ओर टीचिंग स्टाफ के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खून के रिश्तों से सजे कुनबे के लिए भी प्रेरणा के स्त्रोत हैं। कटे हुए हाथ को देखकर उनके लिए कोई मायूसी और लाचारी प्रदर्शित करता नहीं मिलता, जबकि हर कोई उनके कार्य को देखकर उनकी हिम्मत की दाद देता है। धर्मवीर कहते हैं कि जब 10 साल की उम्र में हाथ कटा तो परिवार में मय्यत जैसी स्थिति हो गई थी। उन्होंने उसी दिन से ठान लिया कि उनका तो एक ही हाथ कम हुआ जबकि कई लोग ऐसे हैं जिनके दोनों हाथ पैर भी नहीं होते तब भी वो जीवन जी लेते हैं। आज परिवार ही नहीं स्कूल का स्टाफ कहता मिलता है कि धर्मवीर से ज्यादा कोई काम नहीं करता।
जज्बे को सलाम
झज्जर. साइकिलके जरिए कटे हाथ पर अपना टिफिन लेकर हरफन मोला अंदाज में स्कूल जाते प्रि