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श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंच की पूजा-अर्चना

7 वर्ष पहले
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जींद | नवरात्रके तीसरे दिन शनिवार को चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा अर्चना के लिए मां दुर्गा मंदिरों में खूब भीड़ रही। मां भक्तों ने महामाई के दर्शन कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। शहर के देवी मंदिरों में महामाई में श्रद्धालु पहुंचे और माता के दर्शन किए। दुर्गा काॅलोनी के नव दुर्गा मंदिर में भक्तों ने भगवान सूर्यदेव की आराधना की। इस मौके पर गुरु फतेहसिंह के शिष्य पवन कुमार ने कहा कि सूर्य देवता प्रत्यक्ष देवता है जो समान रूप से सबके घरों में बराबर रोशनी देता है। श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को जल देकर नमस्कार किया।

ईश्वर को पाना है तो अपने अंतर के द्वारों को खोलो, वह परम चेतन तत्व हमारे भीतर ही तो है, जो घर में बैठा है उसे बाहर खोजने की क्या जरूरत है। उक्त विचार आचार्य पवन शर्मा ने शुक्रवार की रात माता वैष्णवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के दूसरे दिन मातृभक्तों को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन में व्यक्त किये। पूर्व वी.सी. डाॅ.अविनाश चावला, घनश्याम सिंघल प्रधान जिला टैक्सेषन बार एसोसिएशन, प्रदीप बतरा एडवोकेट, आर.एस.सिंधवानी एडवोकेट, आर.पी.ग्रोवर, हरबंस मंगला, डाॅ. विनोद अग्रवाल, डाॅ .एम.जी.सूरी, राजकुमार डंग, राजीव गर्ग सौरभ चन्दा ने सपरिवार मां ब्रह्मचारिणा की पूजा-अर्चना कर महायज्ञ में आहुति दी। हरबंस रल्हन, राहुल मिगलानी, हरचरण सिंह संतोष शर्मा ने मां का गुणगान किया शैलेष शर्मा ने तबले पर थाप दी। आचार्य ने कहा-हमारे भीतर मालूम कितना बड़ा खजाना छिपा है और हम बाहर हाथ फैलाए अनेकों लालसाएं लिए इधर से उधर भटक रहे हैं, कहीं सुकून नहींं, कहीं शांति नही। उन्होंने कहा-अक्सर देखा जाता है कि बनारस में रहने वाला व्यक्ति हरिद्वार में जाकर भगवान को ढूंढ़ता है, हरिद्वार वाला उज्जैन में और उज्जैन वाला समझता है कि भगवान मथुरा में मिलेंगे। इसी प्रकार बद्रीनाथ में रहने वाले व्यक्ति की दौड़ रामेश्वरम की ओर है, रामेश्वरम् वाला अमरनाथ जाना चाहता है और अमरनाथ वाला केदारनाथ की ओर दौड़ रहा है। उन्होंने कहा इंसान अंदर से बाहर की ओर भाग रहा है, केन्द्र से परिधि की ओर दौड़ रहा है किंतु उसका लक्ष्य यदि परिधि से केन्द्र की ओर बन जाए तो परमात्मा की दिव्य झांकी तुरंत सुलभ हो जाए अन्यथा मंजिलें तय करते-करते जीवन की सांझ हो जाएगी और लक्ष्य तुम्हारी दृष्टि से ओझल ही रहेगा। पवन गुप्ता, सतीष बतरा, जवाहर