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मिसाल: चार बाल अपराधियों को दो साल तक करनी होगी रोगियों की देखरेख

7 वर्ष पहले
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उम्रछोटी है। पहले जुवेनाइल जेल में रहे और शहर के सरकारी अस्पताल में रोगियों की सेवा कर बाकी की सजा काट रहे हैं। उनके मन पर इस बात का गहरा असर है कि भले ही वे सजा काट लें लेकिन अपराध बोध उन्हें जिंदगी भर टीस देता रहेगा।

एक इंजीनियर की पढ़ाई पूरी कर चुका है तो दूसरा बीकॉम पास है। उनके दो साथी अभी पढ़ रहे हैं। इन का मानना है कि वे आदतन अपराधी नहीं है। हालात और वकीलों की दलील के कारण अदालत ने उन्हें दोषी मान लिया।

जिससेसुबह झगड़ा किया शाम को उसकी मिली लाश

परमीतबताते हैं कि उस समय वे 18 साल के थे जब 4 अप्रैल 2009 को वे हाउसिंग बोर्ड की बंद मार्केट में एक दुकान में वीडियो गेम खेल रहे थे। उनके साथ हाउसिंग बोर्ड के रहने वाले भूपेंद्र (13), शिव काॅलोनी के पवन (14) सफीदों के रहने वाले दिनेश (15) भी थे। किसी बात को लेकर उनका पड़ोसी अमर जीत(22) से झगड़ा हो गया। उसी रात अमरजीत का शव हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी में मिला। पुलिस ने उन्हें अमरजीत की हत्या में गिरफ्तार कर लिया। पांच महीने सोनीपत की जुवेनाइल जेल में काटने के बाद 2011 में जज बशरुदीन की अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई।

2012 में एडीजे कंचन माही की अदालत ने सजा काम कर दो साल कर दी। इस अवधि में उन्हें अस्पताल दूसरी जगह सेवा करनी होगी।

सजा के दौरान जमानत पर आए इन चारों युवकों ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। पवन नमे सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर लिया तो भूपेंद्र ने बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर ली। उनके दूसरे साथी भी पढ़ रहे हैं। परमीत पवन कहते हैं कि किसी दुखी की सेवा कर उन्हें सुकून तो मिलता है। मगर ये दर्द भी नहीं मिटता कि वे हत्या की सजा काट रहे हैं। इसलिए वे अभी से अपना कारोबार करने लगे हैं। अदालत की सजा के अनुसार वे चारों सुबह 8 बजे सरकारी अस्पताल में कर मैट्रन के पास हाजिरी लगाते हैं। इसके बाद अलग वार्ड गेट पर ड्यूटी देते समय इस बात का ख्याल रखते हैं कि कोई वृद्ध, असहाय महिला किसी परेशानी में हो। बुजुर्गों को डिस्पेंसरी से दवाई ले कर देना, डाॅक्टर के पास ले जाकर चेकअप कराना, घायल की पट्टी कराना जैसे काम वे हर रोज करते हैं। दिनेश ने भोपाल की एक घायल महिला के केवल इलाज कराया अपितु ओफन पर सूचित कर उसके घर वालों को भी उससे मिलाया। इसी तरह हर किसी का अपना अलग अनुभव है।