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साढ़े छह माह बीते, नहीं आए 40 करोड़, विकास अटका
चौधरीरणबीर सिंह यूनिवर्सिटी बनने के छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आधारशिला के समय घोषणा की गई राशि आज तक नहीं मिल पाई है। घोषणा की गई राशि में से अब तक केवल पांचवां हिस्सा ही विवि के हाथ लग पाया है। बाकी की राशि के लिए विवि को इंतजार करना पड़ रहा है, जिस कारण विवि के विकास कार्य अटककर रह गए हैं।
बिना बजट के यूनिवर्सिटी कैसे अपने पैरों पर खड़ी हो पाएगी, यह अब चिंतनीय विषय है। बता दें, शुरूआती दौर में चौ. रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने विवि को गति देने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र से 25 लाख रुपए उधार लिए थे। अब यह राशि विवि प्रशासन ने केयूके प्रशासन को वापस लौटा दी है।
दसकरोड़ का बजट खत्म, नहीं मिली ग्रांट राशि
पूर्वसीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 25 जुलाई 2014 को जींद में रोहतक रोड बाइपास पर बने रीजनल सेंटर में अपने पिता के नाम चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी थी। सीएम ने समारोह में मंच से यूनिवर्सिटी को विकसित करने के लिए 50 करोड़ रुपए की राशि आगामी दो दिन में जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका था। लगभग एक माह से अधिक समय बाद यूनिवर्सिटी को 10 करोड़ रुपए की ग्रांट मिली थी। इस ग्रांट से विवि के खर्चे चलाने का काम प्रशासन ने शुरू किया। इस 10 करोड़ रुपए की राशि से यूनिवर्सिटी में कई प्रोजेक्ट शुरू किए जा चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि अब यह 10 करोड़ रुपए की राशि भी अब खत्म होने को हो रही है, जिस कारण बाकी बची राशि की जरूरत विवि को पड़ रही है, लेकिन विवि प्रशासन की तरफ से बार-बार ग्रांट के लिए लिखने के बावजूद अब तक विवि को ग्रांट नहीं मिल सकी है।
सरकार के टच में जल्द ही ग्रांट मिलने की संभावना
^यूनिवर्सिटीबनने के समय तत्कालीन सीएम द्वारा घोषित राशि की बकाया ग्रांट को लेकर वे सरकार के टच में है और उनसे मिलकर बाकी ग्रांट की मांग की जा चुकी है। जल्द ही बाकी ग्रांट मिलने की संभावना है। -मेजरजनरल डा. रणजीत सिंह, वीसी, सीआरएसयू, जींद।
बकाया 40 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलने के कारण विवि के बड़े-बड़े विकास कार्य अटककर रह गए हैं। इसमें ब्वायज हास्टल, एक अन्य ब्लाॅक सहित कई विकास कार्य होने हैं, लेकिन बजट नहीं होने के कारण यह काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इसको लेकर दिसंबर माह में हुई विवि कोर्ट की मीटिंग में भी विवि के विकास को लेकर चर्चा की गई थी। इसमें विवि में होने वाले विकास को लेकर अलग-अलग बजट पर विचार-विमर्श करके उसे अंतिम रूप दिया गया था ताकि बजट का प्रयोग इनके लिए किया जा सके, लेकिन बजट आने के कारण विवि के विकास कार्य अटक कर रह गए हैं।