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स्पीड : दूसरे दिन 373 ने दिखाया दमखम, अब तक 760 ने िदया टेस्ट

6 वर्ष पहले
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स्पीड(स्पोर्ट्स फिजीकल एक्सरसाइज इवेल्यूशन एंड डेवलपमेंट)-2015 दूसरे चरण के टेस्ट के दूसरे दिन मंगलवार को अर्जुन स्टेडियम में जींद ब्लॉक के खिलाड़ियों ने अपने टैलेंट का टेस्ट दिया। दूसरे दिन कुल 373 खिलाड़ियों ने टेस्ट दिया। इसमें 287 लड़के 86 लड़कियां शामिल हैं। इस दौरान खिलाड़ियों ने 8-14 14-19 दो आयु वर्ग में 6 चरणों में टैलेंट टेस्ट दिया। इसमें 30 मीटर फ्लाई दौड़, स्टेंडिंग ब्राड जंप, मेडियन बॉल, 6 बाई 10 मीटर का स्टल रन, फारवर्ड बैंड एंड रिच टेस्ट 800 मीटर की दौड़ का टेस्ट लिया गया।

इनमें581 लड़के और 179 लड़कियां शामिल

दोदिन से चल रहे स्कूली खिलाड़ियों की स्पीड टेस्ट की इस प्रक्रिया में जींद ब्लॉक के कुल 760 खिलाड़ी टेस्ट दे चुके हैं। इनमें 581 लड़के 179 लड़कियां शामिल हैं। बता दें कि जींद ब्लॉक के कुल 1785 खिलाड़ियों ने स्पीड के प्रथम चरण का टेस्ट पास कर सेकेंड टेस्ट के लिए क्वालिफाई किया है। क्वालिफाई करने वालों में 1380 लड़के 405 लड़कियां शामिल हैं।

अभिभावकोंने देखा बच्चों का टैलेंट, बढ़ाया हौसला

स्पीडटेस्ट देने आए काफी बच्चों के साथ इस दौरान उनके अभिभावक भी अर्जुन स्टेडियम में पहुंचे। अभिभावकों ने इस दौरान अपने बच्चों को छह चरणों में दिए गए टैलेंट टेस्ट को आराम से देखा और उनकी हौसला बढ़ाया।

जींद. अर्जुनस्टेडियम में स्पीड टेस्ट के लिए 30 मीटर फ्लाई दौड़ में भाग लेती खिलाड़ी।

जींद. 800मीटर दौड़ में भाग लेते खिलाड़ी।

जींद |स्पीड टेस्टके दूसरे चरण की चल रही टेस्ट प्रक्रिया के दूसरे दिन शहर के एक निजी स्कूल के विद्यार्थियों का सूची नाम नहीं मिला। इस पर टेस्ट देने पहुंचे विद्यार्थियों ने रोष जताया और उन्हें इसके बार बैरंग ही लौटना पड़ा।

टेस्ट देने आए विद्यार्थी आशीष, मन्नु, रितु, अंश, हर्ष, दीवान ने बताया कि मंगलवार सुबह जब वे स्कूल गए तो उन्हें स्कूल से ट्रायल देने के लिए स्टेडियम भेज दिया गया। जब स्टेडियम पहुंचे तो बताया गया कि स्कूल से सूची ही नहीं आई है। संपर्क करने पर स्कूल ने जो सूची भेजी उसमें हमारे नाम ही शामिल नहीं मिले। विद्यार्थियों का कहना था कि स्कूल प्रशासन ने उनकी बजाय दूसरे छात्रों की सूची तैयार कर खेल विभाग के पास भेज दी। जिससे केवल उन्हें ट्रायल से बाहर होना पड़ा, बल्कि उनका पूरा दिन भी बर्बाद हो गया। विद्यार्थियों का आरोप था कि जब स्कूल प्रशासन को अपने मनपसंद के बच्चों की ही ट्रायल करवानी थी, तो फिर उन्हें ट्रायल के लिए क्यों भेजा।