ये हैं नवरात्र के दिन
एक ही साथ होगी मां दुर्गा भगवान राम की पूजा
शारदीयनवरात्र में इस बार गजब का संयोग बना है। श्रद्धालु मां दुर्गा भवानी भगवान राम की पूजा एक ही दिन कर पाएंगे। यानि कि अंतिम नवरात्र के दिन 3 अक्टूबर महानवमी तिथि और विजयादशमी तिथि दोनों एक साथ होंगी। जोकि अपने आप में सुंदर संयोग है। शास्त्रों पुराणों के मुताबिक शक्ति विजय का प्रतीक है और विजयादशमी पर्व इस विजय की पूर्णता का पर्व है।
माता वैष्णवीं धाम के ज्योतिषाचार्य पवन शर्मा के मुताबिक जो साधक इन नवरात्रों में भगवती दुर्गा की आराधना संपूर्ण निष्ठा तन्मयता पूर्वक करते हैं उनको सांसारिक बाधाओं उनके विरोधियों पर निश्चित रूप से विजय प्राप्त होती है। मां जगदम्बा शत्रुओं का पराभव और बाधाओं का निवारण करती हैं। ऐसे में इस बार जो संयोग बना है वह काफी शुभ माना जा रहा है। यानि आराधना करने से भक्त के कष्टों के हरण के साथ-साथ उसकी जीत भी सुनिश्चित होगी।
25 सितंबर प्रतिपदा प्रथम नवरात्र, 26 को द्वितीया, 27 को तृतीया, 28 को चतुर्थी, 29 को पंचमी, 30 को छठ, 1 अक्टूबर को सप्तमी, 2 को दुर्गाअष्टमी और महानवमी, 3 को महानवमी विजयादशमी। नवरात्र व्रतधारी अपना समापन अवसर पर मां को हलवा-पुरी, चने का प्रसाद का भोग लगाकर व्रत खोलते हैं। इस बार विजयादशमी यानि दशहरा भी आखिरी नवरात्र के दिन होने के कारण भगवान विष्णु अवतार श्रीराम की पूजा भी भक्त करेंगे। इसी दिन सुबह श्रद्धालु कंजका पूजन कर व्रत खोलेंगे और शाम को रावण दहन करेंगे।
भगवानराम ने भी मां दुर्गा की आराधना के बाद लंका पर पाई थी जीत
पुराणोंमें उल्लेख है कि भगवान राम ने लंका में समुद्र लांघने से पूर्व समुद्र सेतु पर नवरात्र में नव दिनों तक उपवासरत रहकर भगवती मां दुर्गा की आराधना की थी और तत्पश्चात रावण पर विजय प्राप्त की थी। तब से नवरात्रों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। तब से ही असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व दशहरा मनाया जाता है।