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अब मंत्रालय इसी सप्ताह लेगा फैसला

5 वर्ष पहले
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एकसाल से अटकी जींद-रोहतक फोरलेनिंग परियोजना पर फिर से काम शुरू हो। इसके लिए राजमार्ग प्राधिकरण बैंक अधिकारियों की पांच फरवरी को दिल्ली में हुई बैठक में कोई फैसला नहीं हो पाया। अब मामले का समाधान केंद्रीय सड़क एवं भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय द्वारा इसी सप्ताह राजमार्ग प्राधिकरण बैंक अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक के बाद ही तय हो पाएगा कि जींद-रोहतक फोरलेनिंग पर अटका कार्य फिर से कब शुरू हो पाएगा।

मामला केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को सौंपा : सान्याल

राजमार्गप्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीरेंद्र सान्याल का कहना है कि राजमार्ग प्राधिकरण बैंक अधिकारियों की शुक्रवार को हुई बैठक में कोई भी फैसला नहीं हो पाया। बैंक अधिकारियों ने इस बैठक में लगे पैसे की भरपाई की मांग की है। अब मामला केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को सौंप दिया है और मंत्रालय की हाई लेवल कमेटी ही इस मामले का समाधान कर कोई फैसला लेगी। इसके लिए सप्ताह में मंत्रालय की हाई लेवल कमेटी की बैठक होगी। इसके बाद ही तय होगा कि फोरलेनिंग का काम कब से शुरू होगा पाएगा।

जींद-रोहतक राजमार्ग फोरलेनिंग के अटके प्रोजेक्ट को लेकर पांच फरवरी को दिल्ली में राजमार्ग प्राधिकरण बैंक अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में प्रोजेक्ट पर अब तक कई करोड़ रुपए लगा चुके कई बैंकों के अधिकारियों ने लगे पैसे की भरपाई की मांग की। इसके कारण बैठक में कोई भी फैसला नहीं हो पाया। अब मामले को राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। मंत्रालय ही इस पर फैसला लेगा कि बैंकों के अब तक लगे पैसे की कैसे भरपाई की जाए और दोबारा से प्रोजेक्ट पर कैसे कार्य शुरू करवाया जाएगा। बता दें कि जींद-रोहतक राजमार्ग की फोरलेनिंग का कार्य पीओडी योजना के तहत शुरू हुआ था। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कंनफेक्शनर प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ की कंस्ट्रक्शन कंपनी एमएस विल प्रा. लिमिटेड को फोरलेनिंग का कार्य दिया गया था। इसके कई बैंकों ने विभिन्न शर्तों पर कंपनी को करोड़ों रुपए मुहैया करवाए। इसी बीच मार्च 2015 कंस्ट्रक्शन कंपनी ने फोरलेनिंग का कार्य बीच में अधर में छोड़ दिया। करीब एक साल से फोरलेनिंग का कार्य अधर में ही लटका हुआ है।

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