इन्हें पड़ती है केयर यूनिट की जरूरत
हर माह दाखिल होते हैं करीब 45 नवजात
शिशुओं की देखभाल राम भरोसे
जिलामुख्यालय स्थित सामान्य अस्पताल में चार साल बाद आखिरकार सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की बिल्डिंग तो मिली पर स्टाफ नहीं मिला। लिहाजा नवजातों को केयर यूनिट में भी पूरा स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई गंभीर केसों को यहां से पीजीआई रेफर किया जा रहा है। ऐसे में नन्ही जान को बचाने में अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एसएनसीयू की नई बिल्डिंग में नवजातों के इलाज के लिए तो वेंटीलेटर की सुविधा मुहैया कराई गई है और ही वहां पर मेडिकल आॅफिसर। बस सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ के दम पर केयर सेंटर को चलाने की जुगत की जा रही है।
विभाग के स्वीकृत पदों के मुताबिक न्यू बोर्न केयर सेंटर में तीन मेडिकल आॅफिसर तैनात होने चाहिए। विडंबना यह है कि फिलहाल एक मेडिकल आॅफिसर ही तैनात है, जो अपनी नियमित नियुक्ति के कारण कुछ दिनों बाद ही यहां से जाने वाले हैं। इसके बाद स्वीकृत तीनों पद खाली रह जाएंगे। इसके अलावा एक स्टाफ नर्स की कमी है तथा अटेंडेंट कम स्वीपर के चार कर्मचारी होने चाहिए, जो नहीं हैं।
{जन्म के समय कमजोर नवजात।
{समय से पहले पैदा हुए नवजात।
{जन्म के समय सांस लेने की दिक्कत वाले शिशु
{गर्भ में ही मां की किसी असाध्य बीमारी से प्रभावित बच्चे।
{पीलिया अन्य बीमारी की वजह से नर्सरी में रखना।
डिलीवरी के समय कमजोर बेबी को नर्सरी में रखने की जरूरत पड़ती है। जिले के सामान्य अस्पताल में रोजाना करीब 15 से 20 डिलीवरी होती हैं। इनमें कुछ के बेबी जन्म के समय कमजोर होते हैं, जिनकी केयर के लिए नर्सरी में रखना बेहद ही जरूरी होता है। हर माह करीब 45 से 50 नवजात किसी किसी कारण यहां पर दाखिले करने पड़ रहे हैं। इनमें से गंभीर अवस्था वाले नवजातों को तो बिना सुविधाओं के यहां से पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। यानि हर माह दस प्रतिशत नवजात गंभीर हालत के कारण रेफर किए जाते हैं।
यूनिटमें फिलहाल ये हैं सुविधाएं
सामान्यअस्पताल में प्रसूति वार्ड के साथ लगते करीब 34 लाख रुपए की लागत से तैयार किए गए सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट मेंं 16 इंफेंट वार्मर, 6 फोटो थैरेपी समेत आठ बेड की सुविधा है। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनिल गुप्ता के अनुसार यहां पर इन बोर्न रूम, स्टैप डाउन, ब्रेस्ट फीडिंग रूम, आउट बोर्न कक्ष बनाए ग