जींद में होगा पशुओं का हाईटेक इलाज
जिलेके पशुपालकों के लिए खुशखबरी है। दो माह बाद उन्हें अपने पशुओं के इलाज के लिए हिसार करनाल नहीं जाना पड़ेगा। वे जींद में ही इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। अप्रैल माह में जींद में वेटरनरी पॉली क्लीनिक की सुविधा मिल जाएगी।
नहींजाना पड़ेगा हिसार और करनाल
छहलाख से अधिक गाय भैंस पशुधन आबादी वाले जींद जिले में कोई बड़ा पशु अस्पताल नहीं है, जहां पर गंभीर केसों का इलाज हो सके। पशुओं को गंभीर बीमारी के चलते हिसार करनाल में ले जाना पड़ता था। पॉली क्लीनिक बनने के बाद इस समस्या से निजात मिल जाएगी।
3 जून 2012 की जींद विकास रैली में तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जींद में पशुपालकों की दिक्कत को समझते हुए यहां पर वेटरनरी पॉली क्लीनिक बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए सरकार ने 4 करोड़ 5 लाख का बजट भी निर्धारित करते हुए सफीदों रोड स्थित झोटा फार्म की करीब तीन एकड़ जमीन पर क्लीनिक बनाने को हरी झंडी दी थी।
इसके बाद सरकार ने टेंडर आदि कराकर इसका निर्माण कार्य शुरू कराया। भवन करीब तीन करोड़ की लागत से तैयार होगा। जिसका वर्ष 2014 में इसका निर्माण शुरू हो गया था जो अब 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। लोकनिर्माण विभाग की देखरेख में कराए जा रहे निर्माण कार्य को पूरा करने का समय 31 मार्च 2015 निर्धारित किया हुआ है।
येमिलेंगी सुविधाएं
वेटरनरीपॉली क्लीनिक में दो ऑपरेशन थियेटर, तीन डिस्पेंसरी, एक्सरे रूम, अल्ट्रासाउंड कक्ष, ईसीजी रूम, मिल्क सीमन टेस्ट के अलावा ऊपरी मंजिल पर हाल बनाया गया है। यहां पर मेडिसन, गायनी और सर्जरी के विशेषज्ञ तैनात रखकर पशुओं का इलाज करेंगे।
^जींद जिला दूध उत्पादन में प्रदेश में अलग पहचान बनाए हुए है। जब पशु स्वस्थ ही नहीं रहेंगे तो कैसे दूध की गंगा बहेगी। ऐसे में जरूरत है कि पशुओं को सभी प्रकार की इलाज सुविधा मिले। इसके लिए पॉली क्लीनिक काफी मददगार साबित होगी। किसानों की परेशानी कुछ हद तक कम हो गई -पवन कुमार, पशुपालक
^जिले में गांवों के घरों में पशु बंधे मिलते हैं। शहर की कालोनियों में लोग पशु रखते हैं। पशुधन आबादी वाले जिले में गंभीर बीमारी से ग्रस्त पशुओं के लिए कोई इलाज सुविधा नहीं है। क्लीनिक बनने के बाद यहीं पर यह सुविधा मिल जाएगी। -अतर सिंह, पशुपालक
^जींद में जल्द ही वेटरनरी पॉली क्लीनिक बनकर तैयार हो जाएगी। इससे जिले के पशुपालकों को लाभ मिलेगा। फिलहाल पशुओं के गंभीर केसों को हिसार करनाल ले जाना पड़ता है। क्लीनिक तैयार होने के बाद यह समस्या नहीं रहेगी और पशुओं को त्वरित पूरी इलाज सुविधा यहीं पर मिल पाएगी। -देवेंद्र शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग, जींद
कुल भैंस : 504263,दुधारू भैंसें : 151440
कुलगाय : 119061,दुधारू गायें : 20563
भेड़: 28232,बकरी : 10246
सुअर: 10562,घोड़े खच्चर : 648
डंकी ऊंट : 118
नोट: उपरोक्त आंकड़े पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार हैं।
जींद. वेटरनरीपॉली क्लीनिक की निर्माणाधीन बिल्डिंग।