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जिले के हर घर का बैंक में खाता

6 वर्ष पहले
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जीवनमें खुशहाली लाने का सबसे बड़ा आधार है बचत करना। इसका सबसे अच्छा तरीका है, खर्च कम कर कुछ राशि बचाकर बैंक में जमा की जाए। जींद के लिए लोग अब इसी राह पर निकल पड़े हैं।

जिले में रहने वाला शायद ही अब कोई ऐसा परिवार हो, जिसका किसी बैंक में खाता हो। यह सामाजिक आर्थिक बदलाव करीब एक साल के अंदर जिले में हुआ है। हालांकि लोगों द्वारा भले ही बैंक खाता विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए खुलवाया गया हो, लेकिन आने वाले समय में यही बैंक खाता उनकी बचत का आधार बनेगा और जीवन मेंं समृद्धि लाएगा।

जिलेमें परिवारों की संख्या 2.48 लाख, बैंक खाते हुए 2.49 लाख

जिलेमें इस समय कुल 2 लाख 48 हजार 50 परिवार हैं। जबकि जिले में बैंक खातों की संख्या 2 लाख 49 हजार पहुंच गई है। प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरूआत रसोई गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी बैंक खाते में आने के किए गए प्रावधान के बाद जिले में एकाएक लोगों द्वारा बैंक खाते खुलवाए गए और इसकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।

जिले में हैं 61 शाखाएं

बतादें कि जिले में इस समय कुल 61 बैंक शाखाएं हैं। इसमें 38 शाखाएं अकेले जींद शहर में हैं। जबकि 23 शाखाएं जिले के विभिन्न गांवों कस्बों में खुली हुई हैं।

पहले लोग बैंक में खाता खुलवाने से डरते थे

^अबजमाना बदल गया है। बैंक खाता खुलवाना जरूरी है और इससे फायदा भी होता है। पहले लोगों में धारणा बनी थी कि बैंक में खाता खुलवाने से नुकसान होगा। उसके पास कितने पैसे हैं इसका औरों को पता चल जाएगा। इसी डर से लोग बैंक में खाता नहीं खुलवाते थे।\\\' -फूलसिंह, निवासी अर्बन एस्टेट

बैंक खाता होने से कई फायदे हुए

^मैंनेकई साल पहले बैंक में अपना खाता खुलवा लिया था। इससे उसे फायदा हुआ है। सबसे बड़ा फायदा तो यह हुआ है कि जो मेरे पास पैसे थे उसकी सुरक्षा की चिंता नहीं रही। इसके अलावा बैंक में खाता होने से बचत करने की भी आदत पड़ी है। अब तो खाता खुलवाना और भी जरूरी हो गया है।\\\' -शकुंतला देवी, निवासी कृष्णा काॅलोनी

लोगों में पड़ रही बचत करने की आदत : अमित

भारतीयस्टेट बैंक अर्बन एस्टेट शाखा के मैनेजर अमित कुमार वर्मा का कहना है कि जिले में अब शायद ही कोई ऐसा घर बचा होगा जिसका बैंक में खाता खुला हो। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई धनराशि है तो सिक्युरिटी के लिहाज से बैंक ही सबसे अच्छा माध्यम है। लोग अब यह समझने लगे हैं इस कारण लोगों ने बैंकों में खाते खुलवाए हैं। इसी तरह से लोगों में बचत करने की आदत पड़ रही। सरकार की अधिकतर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी बैंक खाते से मिलने का किए गए प्रावधान के कारण भी बैंक खातों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

जींद की आबादी हुई 13 लाख 34 हजार

जींदजिले में अब कुल आबादी 13 लाख 34 हजार 152 हो गई है। जिले कुल 2 लाख 48 हजार 50 परिवार रह रहे हैं। इसमें 1 लाख 90 हजार 637 परिवार गांवों में रहते हैं। जबकि 57 हजार 413 परिवार शहरी क्षेत्र में रह रहे हैं। कुल 2 लाख 48 हजार 50 परिवारों में से 49 हजार 662 बीपीएल परिवार हैं। इसमें 28 हजार 457 बीपीएल परिवार हैं जो गांव में रहते हैं। जबकि 21 हजार 205 बीपीएल परिवार शहरी क्षेत्र में रह रहे हैं।

एक माह में 4 लाख तक पहुंच सकते हैं खाते

सरकारद्वारा आने वाले दिनों में वृद्धावस्था, विधवा विकलांगों को हर महीने दी जाने वाली पेंशन राशि के बैंक खातों में डाले जाने का प्रावधान किया गया है। इस कारण करीब एक महीने के अंदर ही बैंक खातों की संख्या बढ़कर करीब चार लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। क्योंकि जिले में इस समय कुल 1 लाख 41 हजार पैंशनर्स हैं। इसमें 86 हजार 870 बुजुर्ग, 37 हजार 455 विधवा, 7 हजार 623 विकलांग 5 हजार 598 अन्य पैंशनर्स शामिल हैं। पैंशनर्स के खाते खोलने की जिले में प्रक्रिया शुरू हो गई और प्रशासन ने बैंकों से इस कार्य को जल्द पूरा करने के लिए कहा है।

जींद. भारतीयस्टेट बैंक की अर्बन एस्टेट शाखा में रविवार के दिन भी लेनदेन के लिए पहुंचे उपभोक्ता।