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स्वामी दयानंद ने अछूतों को गले लगाया : रामवेश
महर्षिदयानंद योग चिकित्सा आश्रम अर्बन एस्टेट में रविवार को वैदिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता स्वामी रामवेश ने की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद युग प्रवर्तक थे। उन्होंने दबे-कुचले अछूत लोगों को गले से लगाया सत्य मार्ग का दर्शन करवाया। धार्मिक पाखंड, विधवा-विवाह, छुआछूत, गौकशी जैसी अनेक सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई। उन्होंने नारी के लिए शिक्षा के द्वार खोल दिए और वेद पढ़ने का सबको अधिकार दिलाया।
इस मौके पर सुनील शास्त्री ने कहा कि स्वामी दयानंद की प्रेरणा से हजारों क्रांतिकारी अपने वतन की आजादी के लिए कुर्बानी देने को तैयार हुए। इस अवसर पर जगदीश चंद्र आर्य, सुरजमल खटकड़, रघुवीर सिंह, राजेंद्र सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सत्संग के समापन अवसर पर श्रृद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
जींद. वैदिकसत्संग में बोलते हुए स्वामी रामवेश।
सफीदों. कैवल्यानंदसरस्वती महाराज डॉ. वंदना शर्मा को सम्मानित करते हुए।
सफीदों|श्री स्वामीगोरक्षानंद गाेशाला में चल रही श्रीमद् भागवत व्यास पीठाधीश्वर कैवल्यानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि कर्म के बिना इंसान की यात्रा पूर्ण नहीं हो सकती है। वे रविवार को कथा समारोह में लोगों को प्रवचन कर रहे थे। कथा के अंतिम दिन गोशाला के संस्थापक एवं संचालक स्वामी गोरक्षानंद भी पंहुचे। मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेत्री डॉ. वंदना शर्मा एसडीएम ममता शर्मा ने शिरकत की।डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि गोरक्षा के लिए समिति द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं। उन्होंने गोशाला को 21 हजार रुपए भेंट किए। इस अवसर पर प्रेम सिंह सैनी, योगेश दीवान, ओमप्रकाश सैनी, वेद नंदवानी, डॉ. नरेश वर्मा, बृजेश्वर अग्रवाल, कृष्ण देसवाल, सज्जन आर्य, सुरेश कौशिक, रामेश्वर गुप्ता, रामचंद्र सैनी, मनोज दीवान मौजूद रहे।
सफीदों | प्रजापिताब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सफीदों की वक्ता रजनी ने रविवार को अपने प्रवचन में कहा कि जब-जब धरती पर नैतिक मूल्यों और दिव्य गुणों का नाश होगा तथा धर्म की ग्लानि होगी, तब-तब भगवान इस धरा पर जन्म लेंगे और पवित्रता, दिव्यता, आध्यात्मिकता और शांति की स्थापना करेंगे। उन्होंने कहा कि ईश्वर लोगों को मुक्ति देने के लिए परमधाम, ब्रह्मलोक परलोक नामक प्रकाश पूर्ण देश से धरती पर आते हैं। भगवान ने लोगों को पवित्रता, सुख शांति का वरदान देने के लिए ही ज्ञान यज्ञ रचा है। उन्होंने कहा कि निकृष्ट संस्कारों और कर्मों के कारण संसार पर महाविनाश के बादल मंडरा रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण बढ़ चुका है और जनसंख्या भी अपनी चरम सीमा को पहुंचने वाली है। लोगों को इन खतरों से बचना होगा। इसके लिए लोगों को केवल आध्यात्म का रास्ता अपनाना होगा।
उचाना| भगवानराम का चरित्र मानव कल्याण का सर्वोत्तम साधन है। राम नाम की महिमा अपार है। सभी कष्टों को दूर करने वाला है राम का नाम। इससे हमें भी जीवन के वास्तविक आनंद की प्राप्ति हो सकेगी। यह विचार प. राजकुमार गौतम ने रेलवे चौक पर लाला भगत राम धर्मशाला में साप्ताहिक प्रवचन में कहें।
गौतम ने कहा कि भगवान राम की कथा पवित्र है। इसको सुनने मात्र से ही पाप दूर हो जाते हैं। अपने राजतिलक को छोड़ कर वन में जाकर राम ने मर्यादा की स्थापना की। वनों में 14 साल तक कष्टों को सहते हुए भी अपनी मर्यादा को नहीं छोड़ा इसलिए वो मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहलाए। इस मौके पर लाला प्यारेलाल, डॉ. अवदेश कुमार, बीरेंद्र जैन कापड़ो, रोशनलाल गर्ग मौजूद रहे।