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- 48 साल के बाद भी पुराने ढर्रे पर रोडवेज बसों का टाइम टेबल, कई रूटों पर शाम ढलते ही हो जाती है बस सेवा ब
48 साल के बाद भी पुराने ढर्रे पर रोडवेज बसों का टाइम-टेबल, कई रूटों पर शाम ढलते ही हो जाती है बस सेवा बंद
जींदडिपो से विभिन्न रूटों की बस सेवा आठ बजकर 20 मिनट के बाद नहीं है। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए अब टाइम-टेबल में बदलाव की जरूरत है। कम से कम रात नौ बजे तक तो कई जरूरी रूटों पर बस सेवा होनी ही चाहिए। -बलराज देशवाल, प्रदेशाध्यक्ष,हरियाणा रोडवेज मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन।
कई बार आना-जाना करना पड़ता है केंसिल
जींदसे विभिन्न रूटों के लिए रोडवेज बस सेवा शाम को जल्दी ही बंद हो जाती है। इसके कारण कई बार यदि बाहर गए हैं या जाना है तो बस सेवा मिलने के कारण आना-जाना ही केंसिल करना पड़ता है। बरसों से यह टाइम-टेबल चला रहा है, जबकि अब जमाने में लोगों के कामकाज में काफी बदलाव हो चुका है। रोडवेज प्रशासन को इसमें बदलाव करना चाहिए। -चंद्र प्रकाश, निवासीकुम्हारन मोहल्ला।
महिलायात्रियों के लिए पेरशानी सबसे अधिक
कईरूटों पर बसों के देर शाम को चलने के कारण सबसे अधिक परेशानी महिला यात्रियों को उठानी पड़ती है। पुरुष यात्री दूसरे प्राइवेट साधनों में बैठकर भी चले जाते हैं, लेकिन महिलाओं को उनमें बैठकर जाना भी सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। रोडवेज विभाग को पुराने टाइम टेबल में बदलाव कर विभिन्न रूटों के लिए कम से कम रात 9 बजे तक बस सेवा उपलब्ध करानी चाहिए। -सुभाष चंद्र, निवासीआसरी गेट।
जींद से देर शाम को अंतिम बस सेवा का टाइम-टेबल
रूटसमय
पानीपत8:20 बजे
रोहतक 8:20 बजे
दिल्ली 7:20 बजे
गोहाना 7:00 बजे
करनाल 5: 40 बजे
असंध 6:40 बजे
चंडीगढ़ 4:50 बजे
कुरुक्षेत्र 4:20 बजे
कैथल 7:00 बजे
भिवानी 7:00 बजे
हांसी 8:20 बजे
हिसार 5:20 बजे
नरवाना 8: 20 बजे
बरवाला 6:40 बजे
जींद. बसस्टैंड पर देर शाम बसों का इंतजार करते यात्री।
अलर्ट! 8:20 बजे के बाद जींद से बसें नहीं
सुरेंद्र भारद्वाज | जींद
गर्मीहो या सर्दी यदि आपको कहीं गए हुए देर हो गई। या फिर किसी जरूरी काम के लिए शाम को कहीं जाने की नौबत गई तो आपको इसके लिए जींद से कोई भी रोडवेज बस सेवा नहीं मिलेगी। क्योंकि जींद से शाम को 8 बजकर 20 मिनट के बाद बस सेवा पूरी तरह से बंद हो जाती है।
हर रोज सैकड़ों यात्री देर शाम को बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में इधर-उधर घूमते रहते हैं, लेकिन उन्हें इस दौरान कहीं की भी बस नहीं मिल पाती। हार-थक कर यात्रियों को प्राइवेट साधनों में जाना पड़ता है। इतना