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400 यूनिट रक्त से अधिक स्टोरेज की व्यवस्था नहीं

7 वर्ष पहले
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ब्लड बैंक में बढ़े स्टोरेज क्षमता

ब्लड बैंक : रक्त की जरूरत नहीं, पर मांग रिप्लेसमेंट की

जिलेके युवाओं में रक्तदान करने का कितना जुनून है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के ब्लड बैंक में अब रक्त रखने की भी जगह नहीं है। जरूरत के मुताबिक ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध है, लेकिन एक विडंबना यह भी है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद जरूरतमंद को ब्लड बैंक से रक्त या ता रिप्लेसमेंट पर मिलता है या फिर सिफारिश लगवाने पर। पिछले एक सप्ताह के दौरान ऐसे दो केस सामने आएं हैं, जिनको कई घंटे इंतजार के बाद ब्लड बैंक से जरूतमंदों के लिए रक्त मिल पाया।

एकसप्ताह बाद लगाओ कैंप

ब्लडबैंक के प्रभारी डाॅ. जेके मान ने पिछले सप्ताह रेडक्राॅस सचिव को पत्र लिखकर कहा कि अभी एक सप्ताह तक ब्लड कैंप लगाएं। इन्हें स्थगित कर दें। क्योंकि जरूरत के मुताबिक ब्लड बैंक में रक्त पर्याप्त मात्रा में है। इस पत्र के बाद जिला रेडक्राॅस सोसायटी द्वारा पहले से निर्धारित किए गए कई कैंपों को स्थगित कर दिया गया। अब ये ब्लड डोनेशन कैंप बाद में लगाए जाएंगे।

रिप्लेसमेंटदेने की मांग

पहलाकेस : भिवानीरोड निवासी मन्नू नागर करीब एक सप्ताह पहले ब्लड बैंक में अपनी बीमार मां के लिए रक्त लेने के लिए पहुंचे थे। मन्नू के मुताबिक उनकी मां शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल थीं और डाॅक्टर ने उनके लिए दो यूनिट रक्त मांगा था। इस पर वह जिले के सरकारी अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में पहुंचे। मन्नू का कहना है वहां उपस्थित कर्मचारी ने उनसे बदले में खून देने की मांग की। करीब तीन घंटे तक वह इधर-उधर घूमते रहे, लेकिन ब्लड बैंक से दो यूनिट रक्त नहीं मिल पाया। बाद में जो रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं उनसे संपर्क किया तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर दो यूनिट रक्त दिलवाया।

दूसराकेस : शहरकी चंद्रलोक काॅलोनी निवासी रवींद्र 8 सितंबर को अपने बीमार चाचा के लिए ब्लड बैंक में एक यूनिट रक्त लेने के लिए गए थे। रवींद्र ने बताया कि इस दौरान ब्लड बैंक के कर्मचारी ने बदले में रक्त देने के लिए कहा। वह करीब दो घंटे इसके लिए कोशिश करते रहे कि कोई उसे डोनर मिल जाए। लेकिन बात नहीं बनी तो रवींद्र ने ब्लड बैंक कर्मचारी को बताया कि मैं रेगुलर डोनर हूं, लेकिन इसके बाद भी उसे प्रमाण-पत्र घर से लेकर आने के लिए कहा गया। बाद में उन्