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घबराएं नहीं, यूं ही नहीं हो जाता स्वाइन फ्लू

6 वर्ष पहले
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स्वाइनफ्लू के भय से साधारण जुकाम, बुखार की जांच कराने के लिए अस्पतालों में मरीजों की भीड़ पहुंच रही है। डाॅक्टरों का कहना है कि ऐसा करें। साधारणतः तबीयत बिगड़ने पर इसे स्वाइन फ्लू का नाम दें। जांच कराने से पहले डाॅक्टर को दिखा कर सलाह लें। स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डाॅ. आरएस तंवर बताते हैं कि स्वाइन फ्लू की तीन कैटेगरी होती हैं। इनके अलग-अलग लक्षण हैं। बी-1 तथा बी -2 में टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।

एहतियात बरतें, बिना कारण टेस्ट कराने पर जोर दें : डाॅ. राजेश

डिप्टीसीएमओ डाॅ. राजेश भोला बताते हैं कि जींद में अब तक चार लोगों को स्वाइन फ्लू हो चुका है। स्वाइन फ्लू के लिए दिल्ली की एनसीडीसी पीजीआई रोहतक में ही टेस्ट होता है। इसलिए लोगों को चाहिए वे एहतियात बरतें। बिना कारण टेस्ट कराने पर जोर दें।

ए-कैटेगरी

{हल्काबुखार, खांसी, गले में हल्का दर्द।

{दवा और स्वाइन फ्लू के टेस्ट की जरूरत नहीं।

{घर से बाहर निकलें और एहतियात के तौर पर डाॅक्टर को दिखाएं।

बी-कैटेगरी

{दवाडाॅक्टर्स की सलाह से, टेस्ट की जरूरत नहीं।

{बी- 1 में तेज बुखार, गले में तेज दर्द और खराश। इसमें टेमी फ्लू दवा ले सकते हैं।

{बी-2 कैटेगरी में तेज बुखार और गले में तेज दर्द होता है। यह गर्भवती महिलाओं, लंग्स, हार्ट, कैंसर, लीवर किडनी पेशेंट के लिए है। इसमें मरीजों को दवा के साथ डाॅक्टर की सलाह से विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

सी-कैटेगरी

{दवाटेस्ट जरूरी, अस्पताल में दाखिल हों।

{तेज बुखार, सांस में परेशानी, छाती में दर्द, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, नाखून नीले होना, थूक में खून। इन लक्षणों के होने पर तुरंत टेस्ट कराएं। डॉक्टर की सलाह लेें और अस्पताल में दाखिल हों।

{स्वाइन फ्लू की तीन कैटेगरी होती हैं

{बी-1 बी -2 में टेस्ट कराने की जरूरत नहीं