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कैसे होगा विकास : रही-सही उम्मीद भी टूटी
ऐसी घोषणाओं का क्या फायदा
एनसीआर में शामिल होने से जींद जिले को ये होते फायदे
एनसीआर(नेशनल कैपिटल रीजन) में शामिल होने की घोषणा के बाद संजोए जा रहे सपने अब चकनाचूर हो गए हैं। एनसीआर के नाम से जिले में विकास होने की लोगों द्वारा की जा रही आस भी टूट गई है।
केंद्र सरकार द्वारा जींद के साथ-साथ करनाल को एनसीआर में शामिल करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर पाने की हुई चूक के खुलासे के बाद जिलावासी मायूस हुए हैं। विकास के मामले में पहले से ही पिछड़े जींद जिले का विकास अब कैसे होगा और कौन कराएगा। यह तो समय ही बताएगा, लेकिन विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर हुआ यह खुलासा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा।
घोषणाके बाद खूब लूटी थी वाहवाही
एनसीआरबोर्ड प्लानिंग कमेटी की 20 जनवरी को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई 62वीं बैठक में जींद को एनसीआर में शामिल करने की सरकार द्वारा मुहर लगाई गई थी। सरकार के इस फैसले के बाद से ही जिलेवासियों को लगने लगा था कि अब उनके जिले का विकास में पिछड़ापन दूर हो जाएगा। प्रदेश कांग्रेस सरकार ने भी जिले को एनसीआर में शामिल करने की हुए फैसले के बाद इसका जमकर प्रचार किया गया। जींद जिले में जब भी सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा या कोई मंत्री आया सभी ने जिले को एनसीआर में शामिल करवाने के हुए फैसले पर लोगों की खूब तालियां बटोरी थी। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा हुई चूक ने लोगों की उम्मीदों पर अब पानी फेर दिया है।
विरोधीदलों को मिला मुद्दा
विधानसभाचुनाव के कुछ दिन पहले हुए इस खुलासे के बाद जिले का राजनैतिक पारा एनसीआर के मुद्दे को लेकर और गर्म हो जाएगा। चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं को लोगों से वोट मांगने के लिए कांग्रेस के खिलाफ बोलने के लिए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। जींद जिले में पहले ही विकास में पिछड़ापन एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन एनसीआर में जिले को शामिल करवाने के नाम पर कांग्रेस अभी तक इस पर वाहवाही लूट रही थी। इससे पहले वर्ष 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में विकास के मुद्दे पर ही कांग्रेस यहां से सभी पांचों विधानसभा सीटें हार गई थी, क्योंकि प्रदेश कांग्रेस सरकार में इस दौरान जिले के कई मंत्री होने के बावजूद जिले का विकास नहीं हो पाया था।
यह है एनसीआर
एनसीआर(नेशनल कैपिटल रीजन) यानि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को