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मौलिक मुख्य अध्यापकों को मिले द्वितीय श्रेणी का दर्जा

7 वर्ष पहले
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जींद | मौलिकस्कूल मुख्याध्यापकों को द्वितीय श्रेणी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों की लंबे समय से लंबित मांग रही है कि उनको एक स्कूल मुखिया के रूप में सभी अधिकार, आहरण-वितरण अधिकार तथा द्वितीय श्रेणी का दर्जा दिया जाए।

हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन भी इस मांग को कई बार उठा चुकी है। मुख्याध्यापकों ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। इसकी सुनवाई अगले माह होनी है। हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रमेश मलिक ने जारी प्रेस बयान में कहा कि पंजाब वित्त नियमों के अनुसार आहरण-वितरण अधिकारी को द्वितीय श्रेणी का दर्जा दिया जाना चाहिए। वहीं प्रदेश में सभी आहरण-वितरण अधिकारी द्वितीय श्रेणी में हैं तथा मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों की ग्रेड पे 4800 है तथा 4800 ग्रेड पे के सभी कर्मचारी द्वितीय श्रेणी में है। सरकार को चाहिए कि इस भेदभाव को समाप्त कर मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को द्वितीय श्रेणी का दर्जा दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने अभी तक केवल स्वतन्त्र मिडल स्कूलों के मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को ही आहरण-वितरण अधिकार दिए है।