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दूसरों के साथ तुलना करना दुखों का आमंत्रण देना : पवन शर्मा
जींद |आचार्य पवनशर्मा ने कहा कि सुख-दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। धूप छांव की भांति है। सुख और दु:ख मात्र मन की अनुभूति है। शर्मा बुधवार को माता वैष्णवी धाम में आयोजित सत्संग में उपस्थित श्रृद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि मनुष्य जब अपनी तुलना दूसरों से करने लगे तो मान लेना कि वह दु:खों को आमंत्रण दे रहा है। हर व्यक्ति का नसीब, कर्म और बुद्धि भिन्न-भिन्न हैं। मनुष्य पुण्य किए बिना ही पुण्य का फल तो चाहता है, किंतु पाप करते हुए भी पाप का फल नहीं भोगना चाहता। यही जीव का दुर्भाग्य है और यही जीव के दु:खों का कारण भी है। यद्यपि यह संसार दु:खमय है तथापि इसमें रहकर भी हम सुख का अनुभव कर सकते हैं।