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फ्रांस के किसानों को भी पसंद आई म्हारी मुर्राह

6 वर्ष पहले
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फ्रांसके पशुपालकों किसानों ने बुधवार को कंडेला गांव स्थित प्रदेश के पहले निजी लक्ष्य मिल्क प्लांट का दौरा किया। इस दौरान 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुर्राह भैंस को सराहा और इसका किस तरह से रखरखाव किया जाए। इसके बारे में विस्तार जानकारी ली। लक्ष्य के डेरी फार्मों का अध्ययन किया। बता दें कि भारत में इनकी कीमत ज्यादा है और दूध देने के मामले में भी अधिकता होती है। इस कारण इनकी मांग ज्यादा है।

दहीबनने की भी जानकारी ली

सदस्योंने प्लांट में तैयार होने वाले दही ,पनीर ,घी जैसे उत्पादों को नजदीक से देखा और इन के भण्डारण खपत की भी जानकारी ली। ईवोलूशनइंटरनेशनल कंपनी के डाॅ. संजीव शर्मा ने लक्ष्य मिल्क प्लांट की आधुनिक डेयरी तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि छोटे से ग्रामीण इलाके में स्थानीय संसाधनों का प्रयोग करते हुए एक विशाल उद्योग खड़ा कर प्रदेश में श्वेत क्रांति लाने में अहम भूमिका है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल फ्रांस के किसान गुटियर, रेटिफ, तिसर आदि का कहना था कि उनके देश में भी भैसें पाली जाती हैं, लेकिन वे एक दिन में सात से साढ़े सात लीटर तक ही दूध देती हैं, जबकि उनकी कीमत ढाई से दस लाख रुपए तक होती है। उन्होंने कहा कि यकीन नहीं हो रहा मुर्राह 25 लीटर तक दूध भी देती होगी। फ्रांस के किसान लॉ फूटे ने कहा कि वे भी यहां से मुर्राह नस्ल की एक-दो भैंस अपने देश ले जाएंगे। यदि वहां का वातावरण मुर्राह के अनुकूल रहा तो फिर फ्रांस में भी इस नस्ल का विस्तार किया जाएगा। हरियाणा के गर्म माहौल में पलती ठंडे देशों की नस्ल होल्स्टीन गायों को देखने के बाद भी विदेशी हैरान रह गये। इस मौके पर लक्ष्य मिल्क प्लांट के मैनेजिंग डायरेक्टर बलजीत रेढू ने कहा कि हरियाणा के लिए दूसरे देशों में अपने दूध उत्पाद निर्यात करने की काफी संभावनाएं हैं और आने वाले समय में लक्ष्य मिल्क प्लांट के उत्पादों को दुनिया के कई देशों में भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले विदेशी प्रतिनिधिमंडल का यहां प्लांट प्रबंधन एवं ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत भी किया गया।