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ओपीडी में मरीजों की संख्या 1100 के पार

7 वर्ष पहले
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मरीजों को इलाज नहीं, मिलते हैं धक्के

सरकार ने नियुक्ति कर भेजे 23, पर सिर्फ सात डाॅक्टरों ने की ज्वाइनिंग

मुफ्तइलाज सुविधा कैसे मिलेगी जब सरकारी अस्पतालों में डाॅक्टर ही नहीं हैं। डाॅक्टरों की कमी से जूझ रहे जींद जिले के लिए सरकार ने नई भर्ती कर 23 डाॅक्टरों की नियुक्ति की, लेकिन उनमें से सात डाॅक्टरों ने ही ज्वांइन किया है।

डाॅक्टर सरकारी नौकरी से क्यों मुंह मोड़ रहे हैं या फिर जींद से पिछड़े जिले में नौकरी करना पसंद नहीं कर रहे हैं। कारण चाहे जो भी हो पर खामियाजा तो जींद के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को कैसे स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है, यह अब विभाग और सरकार के लिए चुनौती बन गया है।

120स्वीकृत पदों पर हैं सिर्फ 46 डाॅक्टर

जिलेमें जींद नरवाना के सामान्य अस्पतालों, सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सेहत रोग विशेषज्ञों के 120 पद स्वीकृत किए गए हैं। पर विडंबना यह है कि इनमें से दो तिहाई के लगभग पद खाली पड़े हैं। फिलहाल जिले में 46 डाॅक्टर ही जैसे-तैसे कर मरीजों की सेवा के लिए कार्यरत हैं। इन डाॅक्टरों में से कुछ डाॅक्टरों को डेपुटेशन पर ही रखा जाता है। कभी किसी अस्पताल में तो कभी किसी स्वास्थ्य केंद्र में।

जींदसामान्य अस्पताल के सामान्य नहीं हालात

जिलामुख्यालय स्थित सामान्य अस्पताल के हालात सामान्य नहीं हैं। यहां पर कुल स्वीकृत 42 पदों में से सिर्फ 14 डाॅक्टर ही तैनात हैं। मगर इनमें से भी कई डाॅक्टर छुट्टी पर चल रहे हैं तो कुछ डाॅक्टर मीटिंग, कोर्ट एविडेंस जेल ड्यूटी में व्यस्त रहते हैं। अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार की संख्या में मरीजों की ओपीडी होती है। इसके लिए बड़ी मुश्किल से 5-6 डाॅक्टर ही उपलब्ध मिलते हैं। ऐसे में काफी मरीज तो डाॅक्टर के इंतजार में थक हारकर वापस घर लौटने पर मजबूर होते हैं।

^सामान्य अस्पताल में मरीजों को इलाज नहीं धक्के मिलते हैं। ओपीडी में डाॅक्टर मिलते ही नहीं। मैं यहां अपने शरीर की जांच के लिए आया था, लेकिन रिपोर्ट नहीं हो पाई है। पहले तो डाॅक्टर लेट आए और फिर लैब वालों ने जांच के लिए कहा आज नहीं कल आना। हम 12 बजे के बाद सैंपल नहीं लेते। -अमरसिंह,मरीज,बिघाना।

बिना दवा के लौटा

^मैंसुबह से अस्पताल में दवाई लेने पहुंचा हूं, लेकिन यहां पर बताया कि डाॅक्टर छुट्टी पर हैं।