दुख था बेटी जन्म का, बेटी तो मरहम बणी, बेटा बणग्या घाव...
हिंदीसाहित्य प्रेरक संस्था की ओर से ऋतुराज बसंत के आगमन पर शनिवार देर शाम बाल भवन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जिले के कई कवियों साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कवियों ने जहां अपनी कविताओं से ऋतुराज बसंत का स्वागत किया। वहीं, कई कवियों ने समाज में कन्या भ्रूणहत्या बेटी के सम्मान को लेकर कविता सुनाई। नवोदित कवियत्री नीलमणी अलेवा ने बेटियों को समर्पित अपनी कविता दु:ख था बेटी जन्म का, बेटे का था चाव, बेटी तो मरहम बणी, बेटा बणग्या घाव सुनाई तो खूब तालियां बजी।
इस काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. डाॅ. मंजू लता रेढू ने की। गोष्ठी का आगाज करते हुए नवोदित कवयित्री एवं गीतकार सुमेधा आर्य ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, शुरुआत है यह तो जिंदगी की, भरनी है अभी ऊंची उड़ान, करनी होगी मेहनत कड़ी, गर पाना है अपना मुकाम।
मरनामुश्किल नहीं जगत में, मुश्किल तो जीना है : कविमनोज वंश ने दुनिया में बार-बार ठोकर खाने वालों को नसीहत देते हुए कहा, मरना मुश्किल नहीं जगत में, मुश्किल तो जीना है, जो ठोकर खाकर संभले, उसका भी क्या जीना है।
सारेजग नै छा ज्यावै :कवियत्री शकुंतला देवी ने अपनी देशभक्ति की कविता को यूं उकेरा काश! इसा दिन ज्यावै, इस धरती पै देश यो मेरा, सारे जग नै छा ज्यावै कविता सुनाई।
मानवजन्म है अनमोल :कवि ओमप्रकाश चौहान ने मानव-जीवन की सार्थकता को उकेरते हुए कहा, मानव जन्म अनमोल है, रखिए नेक विचार, कुछ ऐसा करते चलो, याद करे संसार।
गैर हो तो फिर भी हम शिकवा करें, कोई अपना ही हमें छलता...
शिक्षाविद्गजलकार राजेंद्र मानव ने मनुष्य के भीतर छिपे अवगुणों को रेखांकित करते हुए गजल पढ़ी, गैर हो तो फिर भी हम शिकवा करें, कोई अपना ही हमें छलता रहा। संस्था के अध्यक्ष हरियाणा के प्रख्यात साहित्य समीक्षक रामफल सिंह खटकड़ गोष्ठी में अपनी कविता से धैर्य की परिभाषा इस प्रकार दी। पहले पतझड़ को कहने दो, सावन से बात फिर कर लेंगे, पहले रजनी तो होने दो, दीपक की जात फिर जल लेंगे।
जींद. बालभवन में आयोजित काव्य गोष्ठी में उपस्थित जिलेभर के कवि।