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पेंशन के लिए धक्के खा रही सैनिक की विधवा
कुड़लकी सैनिक विधवा को अपनी पेंशन लेने के लिए बैंक और संबंधित विभाग के धक्के खाने पड़ रहे हैं। तीन वर्ष पहले न्यायालय से पेंशन हासिल करने का हक पाने वाले उसके पति को पेंशन मिलने से पहले ही बीमारी के चलते परिजनों को अलविदा कह गए। उनके निधन के बाद अब उनकी विधवा को वह हक नहीं मिल पाया है जिसकी वह हकदार है।
जानकारी के अनुसार गांव कुड़ल निवासी स्वर्गीय सुखबीर सिंह भारतीय तोपखाना विभाग में नौकरी करते थे। बीमारी के कारण उन्हें अपनी नौकरी बीच में छोड़नी पड़ी। मगर सेना की ओर से उनकी पेंशन नहीं बन पाई तो उन्होंने अदालत का सहारा लिया। इसलिए सैनिक होने के नाते उन्हें न्यायालय से 2011 में फैमिली पेंशन पाने का हक मिला। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। बीमारी के चलते कोर्ट के फैसले के बाद सुखबीर जिंदगी की जंग हार गए। इसलिए उनकी पेंशन पाने का हक उनकी विधवा रेशमा देवी और बेटे संदीप को फिर से नई लड़ाई लड़नी पड़ी। न्याय की इस लड़ाई में सैनिक विधवा को पेंशन के लिए संबंधित विभाग ने इसी साल अगस्त में पीपीओ पत्र भी जारी किया।
काटरही दफ्तर के चक्कर
इसपत्र के माध्यम से विभाग ने प्रार्थी के बैंक अकाउंट नंबर के लिए पास लगते जुई की स्टेट बैंक आफ पटियाला के लिए पत्र जारी किया। मगर बैंक अधिकारियों ने इस मामले में अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है। बैंक कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण सैनिक विधवा को मिलने वाले भत्ते और फैमिली पेंशन के लगभग 20 लाख रुपये नहीं मिल पा रहे। इस बारे में रेशमा देवी ने बताया अगस्त से आज तक वह अपने बेटे संदीप के साथ बैंक जिला सैनिक पेंशन कार्यालय में कई चक्कर लगा चुकी है। मगर उसे अभी तक उसका हक नहीं मिल पाया है।
उन्होंने बताया कि जिला सैनिक पेंशन कार्यालय के कर्मचारियों ने उसे कहा कि वे जुई बैंक से अपनी कार्रवाई कराने के बाद पेंशन के पैसे उसके खाते में ट्रांसफर करा देंगे। मगर उसे अभी तक तो बैंक रिस्पांस दे रहा और ही संबंधित विभाग का पेंशन कार्यालय।