चकबंदी नहीं तो किलाबंदी ही करा दो
पंचायत प्रस्ताव लिख कर दे चुकी है
जुईखुर्द के सरपंच सुभाष शर्मा और जुई बिचली की सरपंच ओमपत्ती देवी ने बताया कि गांव में चकबंदी होने से दोनों गांवों के लोग परेशानी में है। पंचायत चकबंदी करने के लिए प्रस्ताव लिख कर दे चुकी है। विभाग ने सुस्त रवैया अपना रखा है। खेतों मे जाने के लिए किसानों की हर रोज तकरार हो रही है। प्रशासन को जल्द से जल्द चकबंदी करानी चाहिए।
कार्यप्रगति पर है: जगत सिंह पटवारी
चकबंदीका काम देख रहे पटवारी जगत सिंह ने बताया कि वे ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का मुआवजा बांटने में लगे हुए हैं। अभी केंद्र से सूखा प्रभाव देखने के लिए टीम गई है। इस कारण वे उसमें व्यस्त हैं। चकबंदी का काम भी चल रहा है समय तो लगेगा। कितना समय लगेगा इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
भास्कर न्यूज | जुई
जुईखुर्द और जुई बिचली में जमीन की चकबंदी होने से ग्रामीणों में रोष है। चकबंदी नहीं होने से खेतों के रास्ते को लेकर ग्रामीणों के बीच विवाद पैदा हो रहे हैं। इसके अलावा लोगों को जमीन का रिकार्ड लेने में भी ज्यादा रुपया खर्च करना पड़ रहा है। चकबंदी कराने के लिए विभाग पिछले छह साल से काम कर रहा है। मगर नतीजा अभी भी जस का तस है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्दी चकबंदी कराने की मांग की है।
परेशानीबताई ग्रामीणों ने
जुईनिवासी अतर सिंह लांबा, विजय रापडिय़ा, बंसीलाल श्योराण, हरपाल लांबा, राजेंद्र गांधी, भूपसिंह आर्य, राजेश लांबा, शीशराम, रोहताश शर्मा, राजबीर सिंह, राहुल रापडिय़ा, ओमप्रकाश बादल, मीरसिंह, रतनपाल, मंजीत रापडिय़ा, मांगेराम, सोनू, विजय कुमार, जगबीर, महीपाल सिंह, महेंद्र सिंह, सतबीर सिंह, जयबीर ने बताया कि गांव में जमीन की चकबंदी होने से गांव वाले दिक्कत का सामना कर रहे हैं। जरूरी काम की वजह से जब वे जमीन का रिकार्ड निकलवाते हैं तो उन्हें चार पीढिय़ों तक के परिवारों का रिकार्ड लेना पड़ता है। जमीन का रिकार्ड कंप्यूटरीकृत होने की वजह से पटवारियों को भी रिकार्ड देने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा ग्रामीणों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। हालांकि गांव की चकबंदी का रिकार्ड पूरा करने के लिए प्रशासन ने दो पटवारी लगाए हुए हैं। मगर उनके काम की गति को देखते हुए अगले 10 साल में भी चकबंदी होने की संभावना नहीं है। इस बारे में ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग करते हुए कह