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जीरी के अवशेष जलाने पर होगी कार्रवाई

7 वर्ष पहले
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कैथल|जिलाधीश एनकेसोलंकी ने धारा 144 के तहत आदेश जारी करते हुए धान की फसल की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिलाधीश के अनुसार जिला कैथल की सीमा के अंदर फसल की कटाई कंबाइन से करवाने के पश्चात उसके अवशेषों को जला दिया जाता है। इन अवशेषों के जलाने से होने वाले प्रदूषण से मनुष्य के स्वास्थ्य, संपत्ति की हानि, तनाव, क्रोध मानव जीवन को भारी खतरे की संभावना रहती है। इन अवशेषों को पशु के चारे के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इसके जलाने से चारे की कमी पैदा हो सकती है। धान की कटाई के बाद अवशेषों को जलाने पर जिला की सीमा में रोक लगा दी गई है। इन आदेशों की अवहेलना करने पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 संपठित वायु एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत दंड का प्रावधान किया जाएगा। कृषि विभाग के जिला उप निदेशक डा. रोहताश सिंह ने कहा कि धान के अवशेष जलाने से धरती की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। किसान के मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। किसानों को अवशेषों को जलाने की बजाए दो से तीन जुताई करनी चाहिए। इसके बाद पानी लगाएं।