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बेंच, कुर्सी-मेज की बजाय शिक्षा की गुणवत्ता पर दें बल

5 वर्ष पहले
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धरने में 22 स्टेट लेंगे हिस्सा

शर्माने बताया कि जंतर-मंतर पर होने वाले धरने में 22 राज्यों के स्कूल संचालक कााग लेंगे। उन्होंने बताया कि अभी तो स्कूलों के संचालकों को ही वहां बुलाया गया है। अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे स्कूलों की हड़ताल काी करवा सकते हैं।

भास्कर न्यूज| कैथल

सरकारबैंच,कुर्सी, मेज, शौचालय के निर्माण पर जोर देने की बजाए शिक्षा की क्वालिटी पर ध्यान दें। जिला में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) नहीं क्वालिटी एजुकेशन ऑफिसर (क्यूईओ) होना चाहिए। ऐसा प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा। वे सनातन धर्म मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे। उनके साथ एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रविभूषण गर्ग भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को 24 फरवरी को जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। शर्मा ने कहा कि देश में राइट टू एजुकेशन(आरटीई) सही ढंग से लागू नहीं की गई है। देश में आरटीई के कारण करीब एक लाख स्कूल बंद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में क्वालिटी ऑफ एजुकेशन ऑफिसर होना चाहिए। स्कूल छोटा या बड़ा। स्कूल में संधासन कम हो, लेकिन वहां शिक्षा बेहतर हो। ऐसे स्कूलों को नियम-कायदों में उलझाने के स्थान पर उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे शिक्षा बेहतर होगी। प्राइवेट स्कूल बेहतर काम कर रहे हैं। इसी कारण सीएम मनोहर लाल ने प्राइवेट स्कूल संचालकों से सुझाव मांगे हैं। आरटीई के तहत स्कूलों को दिए जाने वाला पैसा सीधा बच्चों के खाते में दिया जाए। इस पैसे को एजुकेशन वाउचर के रुप में बच्चों को दिया जाए। इससे बच्चा अपनी सुविधा अनुसार स्कूल का चयन कर वहां शिक्षा ग्रहण कर सकेगा। इस प्रक्रिया से सभी को लाभ होगा। इस अवसर पर पूर्व प्रधान वरुण जैन, जोगिंद्र कुंडू, प्रवीण प्रजापति सहित अन्य स्कूल संचालक उपस्थित थे।

स्कूलनहीं शिक्षा बचाने का कर रहे प्रयास : राष्ट्रीयाध्यक्षने कहा कि वे स्कूल नहीं शिक्षा बचाने का संघर्ष कर रहे हैं। सरकार प्रशासन प्राइवेट स्कूल संचालकों पर व्यावसायिकरण का आरोप लगाती है, लेकिन सरकार ने उन पर लगाए कर्मिशियल टैक्स अन्य नियमों को काूल जाती है। जिस कारण उनका अधिक खर्च होता है। उन्होंने कहा कि सरकार प्राइवेट स्कूलों में बेवजह हस्ताक्षेप कर रही है। सरकार एक भी ऐसा मॉडल स्कूल बता दें, जहां प्राइवेट स्कूलों से अच्छी पढ़ाई होती हो। जब ऐसा नहीं है तो प्राइवेट स्कूलों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्हें बंद करने की कगार पर नहीं भेजना चाहिए।

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