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एफआईआर की कॉपी देने सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीज को बुलाया थाने

7 वर्ष पहले
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पुलिसनेएफआईआर की कॉपी देने के लिए मरीज को सरकारी अस्पताल से थाने बुला लिया। देर शाम को एंबुलेंस से सिटी थाने पहुंचे मरीज को मुंशी ने एफआईआर की कॉपी सौंपी। खुराना रोड, सुभाष नगर निवासी छज्जु का किसी बाद को लेकर अपने परिवार वालों के साथ झगड़ा हो गया। परिवार वालों द्वारा की गई मारपीट में छज्जु के टांगों में फ्रेक्चर गया। हमलावरों ने उसकी प|ी रोशनी के साथ भी मारपीट की। दोनों सरकारी अस्पताल में दाखिल है।

छज्जु की दोनों टांगों पर पलस्तर लगा हुआ है। सुखविंद्र ने बताया कि घायल मौसा और मौसी (छज्जु रोशनी) सरकारी अस्पताल में दाखिल हैं। वह सिटी थाने में एफआईआर की कॉपी लेने के लिए गया। लेकिन मुंशी ने यह कहकर कॉपी देने से मना कर दिया कि हम किसी को कॉपी नहीं देंगे। अगर मरीज आएगा तो ही उसे कॉपी दी जाएगी। पुलिस कर्मचारियों को यह भी बताया गया था कि मरीज दोनों अस्पताल में दाखिल हैं। वे नहीं सकते। लेकिन कर्मचारी फिर भी नहीं माने। इस पर उन्हें सरकारी अस्पताल से एंबुलेंस करके सिटी थाने पहुंचना पड़ा।

एंबुलेंस से थाने पहुंचा सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीज।

खून के रिश्ते को हो दी जा सकती है कॉपी : एसएचओ अशोक

सिटीएसएचओ अशोक कुमार गोयल ने कहा कि मरीज अगर सरकारी अस्पताल में दाखिल था तो उन्हें बताया जाना चाहिए था। इस मामले में मुझे कोई व्यक्ति मिला ही नहीं। अगर मेरे पास आते तो मैं समस्या हल करवा देता। उन्होंने कहा कि कई बार कोई व्यक्ति पीडि़त के परिवार का सदस्य बताकर एफआईआर की कॉपी ले जाता है। इसका दुरुपयोग भी होने की संभावना बनी रहती है। एफआईआर की कॉपी मरीज के खून के रिश्ते को ही दी जा सकती है।