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एक्सपोर्ट बंद होने से निर्यातकों को नुकसान
धानकीखपत का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले देश ईरान ने भारत से एक्सपोर्ट की जाने वाली धान पर रोक लगा दी है, जिस कारण किसान निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदेश से 18 से 20 लाख टन धान निर्यात किया जाता है।
प्रदेश के तीन जिले कैथल, करनाल कुरुक्षेत्र से सबसे अधिक मात्रा में धान की पैदावार होती है। इस सीजन में पिछले साल की अपेक्षा अधिक धान की पैदावार हुई है। धान में आने वाली लागत अधिक होने से प्रदेश के किसान मायूस हैं, वहीं आढ़ती निर्यातक भी सरकार की नीति से खपा हैं। सरकार को अपनी नीति में बदलाव करके ईरान जैसे देशों से धान के एक्सपोर्ट पर लगी रोक को हटवाने के लिए कदम उठाने चाहिए। साथ ही दोनों देशों के मध्य जानकारियां भी सांझा करनी चाहिए।
क्याकहना है निर्यातकों का: चावलनिर्यातक सचिन सिंगला ने बताया कि धान के निर्यात पर केंद्र सरकार ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। प्रदेश में 2 प्रतिशत मार्केट फीस 2 प्रतिशत विकास कर है, जबकि पंजाब, उत्तराखंड उत्तर प्रदेश सरकार नरे विकास कर के साथ मार्केट फीस नि:शुल्क कर दी है। दिल्ली में यह एक प्रतिशत है। यहां धान पर वैट नहीं लगता। इसके विपरीत हरियाणा में 4 प्रतिशत फीस तथा 5 प्रतिशत वेट लगता है।
कम कीमत पर बेचनी पड़ रही जीरी
भारतीयकिसान संघ के प्रदेश प्रवक्ता रणदीप सिंह आर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों को धान कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिस कारण खेती करना घाटे का सौदा बन रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। खेती पर लागत अधिक रेट कम मिल रहे हैं और ऊपर से धान का निर्यात होना भी सबसे बड़ी समस्या बन रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि ईरान जैसे देशों से बात करके धान पर लगी रोक को हटवाया जाए ताकि किसान, आढ़ती निर्यातकों को नुकसान से बचाया जा सके।