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पंचायतों में 33% नहीं शतप्रतिशत मिले महिलाओं को अारक्षण : रीना

6 वर्ष पहले
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हरियाणाग्रामीणविकास संस्थान की ओर से सोमवार को कैथल ब्लॉक के छह गांवों भैनी माजरा, जगदीशपुरा, खुराना, ग्योंग, सजूमा और मानस पट्टी की पंचायतों को पंचायत भवन में पांच वर्षों में आई दिक्कतें किए गए विकासात्मक कार्यों की फीड बैक के लिए बुलाया गया। फीड बैक के दौरान सरपंचों और पंचों ने सिस्टम के अलावा एक दूसरे पर पक्षपात किए जाने पर खूब भड़ास निकाली। हालांकि प्रशिक्षक सुशील कुमार जांगड़ा और सुनीता जांगड़ा ने उन्हें अपने कर्तव्यों अधिकारों का अहसास दिलाकर शांत कराया।

हमारेतो यहां बोतल से ही पास हो जाते हैं प्रस्ताव : भैणीमाजरा के पंच फूल सिंह ने बताया कि पंचायत में अधिकतर पंचों को बुलाया ही नहीं जाता। शाम को घर पर बोतल पहुंचती हैं और गलत प्रस्ताव भी पारित हो जाता है। ग्योंग के पंच भीम सिंह ने कहा कि पंचायत में पहला प्रस्ताव ही महिलाओं की भागेदारी सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए। अन्यथा उन्हें पंचायत से निकाल देना चाहिए।

पंचबोला हमारे गांव में दो-चार पंचों को लेकर होती हैं पंचायत : मानसपट्टी के सरपंच रामकुमार पंच महाबीर सिंह एक दूसरे के साथ उलझते रहे। महाबीर ने कहा कि कभी पंचायत में नहीं बुलाया गया। सरपंच दो चार पंचों से फैसले करता है। यहां तक की पेंशन जैसी योजनाओं को लागू करने के अवसर पर भी उन्हें अनदेखा किया जाता है।

सरपंचों को अधिकारों कर्तव्यों के बारे में नहीं है जानकारी

प्रशिक्षकसुशील कुमार जांगड़ा ने बताया कि कुछ सरपंचों को पंचायत की बैठकों के बारे में पता नहीं हैं। जब उनसे पूछा गया थी एक्ट 1994 के तहत पंचायत की कितनी बैठकें होनी चाहिए तो किसी ने अधिकतर ने सही संख्या दो नहीं बताई। सरपंचों को अधिकारों कर्तव्यों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है।

>हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान की ओर से पंचायतों को पंचायत भवन में पांच वर्षों में आई दिक्कतें किए गए विकासात्मक कार्यों का मांगा गया फीड बैक

कभी पंचायत में हिस्सा लेने के नहीं बुलाते

ग्योंगकी सरपंच परमजीत कौर ने कहा कि गांव में पंचायतें अकसर होती रहती हैं। लेकिन महिलाओं को पंचायतों में कभी नहीं बुलाया जाता। अगर ऐसा ही किया जाना है तो पंचायतों में महिलाओं की हिस्सेदारी समाप्त कर देनी चाहिए। पंचायत में हिस्सा लेने के कारण महिलाओं को गांव में हो रहे विकासात्मक कार्यों के बारे में जानकारी ही नहीं होती।

दो-चार महिला पंच होती हैं अनदेखी का शिकार

गांवखुराना की सरपंच रीना देवी ने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को 33 प्रतिशत नहीं शतप्रतिशत आरक्षण चाहिए। अन्यथा उन्हें पंचायत में शामिल ही नहीं करना चाहिए। अगर महिलाओं की पंचायत होगी तो वे स्वतंत्र तौर पर अपने फैसले कर सकेंगी। अब पंचायत में दो-चार महिला पंच होती हैं। उन्हें अनदेखा करके पंचायत स्वयं फैसले करती है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। जगदीशपुरा की सरपंच कैलाश कौर ने कहा कि पंचायत में अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में वे स्वयं पंचायत के कार्यों को देखती हैं। गांव का विकास और लोगों को आई दिक्कतों का समय पर निपटान किया जाता है। अधिकतर समस्याएं थाने के स्थान पर पंचायत में ही निपटा ली जाती हैं।

कैथल . पंचायत भवन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद महिला पंच-सरपंच।