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\"म्हारी जान का दुश्मन बण रहया, दूर तै पाकिस्तान, जमी रोड़े ज्यूं रड़कै इसती म्हारा हिंदुस्तान\'

7 वर्ष पहले
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कैथल | आरकेएसडी कॉलेज में स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग द्वारा फ्रेशर्स पार्टी के कार्यक्रम में हिस्सा लेते विद्यार्थी।

हिंदी दिवस पर साहित्य सभा ने किया गोष्ठी

कैथल|हिंदी दिवसपर साहित्य सभा के सदस्यों ने आरकेएसडी कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजित की। अध्यक्षता हरीश झंडई संचालन ईश्वर गर्ग ने किया। डाॅ. संजीव कुमारी की हरियाणा साहित्य अकादमी के अनुदान से प्रकाशित पुस्तक हरियाणा के लोकगीत का लोकार्पण किया गया। भ्रष्टाचार पर कटाक्ष करते हुए सूबे सिंह राविश ने कहा- देखो आया टिड्डी दल, फसलें खाता टिड्डी दल।

डाॅ. चतरभुज बंसल ने भारत-पाकिस्तान की द्वंद्धता पर कहा- म्हारी जान का दुश्मन बण रहया, दूर तै पाकिस्तान, जमी रोड़े ज्यू रड़कै इसती म्हारा हिंदुस्तान। कुमारी अनामिका ने आम आदमी के बारे में कहा- बड़े-बड़े आश्वासन देता मैं कोई बड़ा नेता नहीं, मैं एक आम आदमी हूं। रामफल गौड़ की हरियाणवी गजल का अंदाज देखिए- ना दुश्मन ना कोई यार सै, सब हालत के अनुसार सै, उतनी नफरत का खतरा सै, जितना गाढ़ा जड़ै प्यार सै। डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने हिंदी के विषय में कहा- यूं तो आसान है हिंदी, लेकिन इक विज्ञान है हिंदी। दिलबाग सिंह ने कश्मीर की त्रासदी के बारे में कुछ यूं बयां किया- दिल बहलाने वाली वादी, दिलदहलाने में लगी है। हिंदी की गरिमा को पंकज खोसला ने यूं कहा- हिंदी भारत देश की भाषा। भारतीयों को इस पर मान है। रविंद्र रवि की गजल की बानगी देखिए-गम से मैं घबराया भी और फिर हाथ मिलाया भी, रात थे दोनों मुश्किल में, मैं ओर मेरा साया भी। रिसाल जांगड़ा ने हिंदी भाषा के विषय में यूं कहा- हिंदी राष्ट्र भाषा अपनी सहर्ष इसे स्वीकार करें, अपना कर हिंदी भारत मां का हम सपना साकार करें। विजय कृष्ण राठी ने अंग्रेजी भाषा को गुलामी का प्रतीक मानते हुए कहा- कहां गुलामों की भाषा में विकास कराने निकल पड़े। रामकुमार भारती ने हिंदी की मौजूदा स्थिति को यूं बयां किया- हिंदी हूं मैं हिंदी हूं, भारत की मां की बिंदी हूं। मैं देश की राष्ट्र भाषा हूं, पर मन के लिए निराशा हूं। विकास ढांडा, उर्दू के शायर बाल किशन बेजार, राजकुमार मदान, डाॅ. अशोक अत्रे, सतबीर जागलान, राकेश कैत ने भी अपनी रचनाएं पेश की। साहित्य सभा के प्रधान अमृत लाल मदान ने कहा कि हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति सभ्यता का दर्पण भी है।

वहीं कॉलेज में